बिहार के गया जिले में महात्मा बुद्ध की ज्ञानस्थली बोधगया के दूसरे बुद्ध कहे जाने वाले द्वारिको सुंदरानी का आज निधन हो गया। वह लगभग 100 वर्ष के थे। सूत्रों ने बताया कि सुंदरानी विगत कई दिनों से बीमार चल रहे थे। उन्होंने बोधगया वासियों के लिए पूरा जीवन समर्पित कर दिया। वह भंसाली ट्रस्ट के माध्यम से मोतियाबिंद का नि:शुल्क ऑपरेशन वर्ष 1984 से करा रहे थे। 

वह अब तक कुल सात लाख 86 हजार लोगों की आंखों का नि:शुल्क ऑपरेशन करवा चुके थे। भारत-पाकिस्तान बंटवारा से पहले तत्कालीन ङ्क्षसध प्रांत निवासी सुंदरानी भगवान बुद्ध की शरण में आए और महात्मा गांधी से शिक्षा लेने के बाद विनोबा भावे के साथ काम किया और भूदान आंदोलन में शामिल होकर गरीबों को गांव में बसाने में जुट गए। 

बोधगया के आस-पास कई दलित गांव को उन्होंने बसाया। वे बोधगया महाबोधि मंदिर टेंपल मैनेजमेंट कमेटी के सचिव पद पर भी रहे थे। उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने जमुनालाल बजाज अवार्ड से सम्मानित किया था। वे ग्रामीणों क्षेत्रों में मुसहर, मांझी आदि महादलितों को शिक्षित और संगठित करने के लिए स्कूल और आश्रम चलाते थे।