पश्चिम बंगाल के हाकिमपाड़ा में इस वर्ष इस राज्य की जनजाति की संस्कृति देखने को मिलेगी। यहां पर नागालैंड की संस्कृति को आधार बनाकर दुर्गा पूजा पांडाल बनाया जा रहा है। जिसमें इस जनजाति के गहने, कपड़े उनके हथियार सहित अन्य सामग्रियों से पंडाल की सजावट की जा रही है। इसमें वहां की रंगारंग संस्कृति को बहुत ही खूबसूरती के साथ दर्शाया जा रहा है।

पांडाल बनाने का कार्य इस समय जोर-शोर से किया जा रहा है। इस पांडाल को मेदिनीपुर के लगभग 25 कारीगर तैयार कर रहे हैं। यह कार्य पिछले महीने से जारी है। नागालैंड की संस्कृति को आधार बनाकर पंडाल बनाने का कार्य किया जा रहा है जो देखने में बहुत खूबसूरत लगेगा। इस तरह का पंडाल बनाने का प्रमुख लक्ष्य है कि हमारी भावी पीढ़ी नागा संस्कृति के बारे में जान सकें। 

पांडाल बनाने वालों का कहना है कि आजकल हम गांव की संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं। वहीं देवी दुर्गा की प्रतिमा कोलकाता से बनकर आएगी। कोलकाता के मूर्तिकार मोहन बासी और रुद्र पाल के द्वारा प्रतिमा का निर्माण किया जा रहा है। इस पांडाल में देवी दुर्गा भी नागालैंड की संस्कृति में सजी-धजी नजर आएंगी इसके लिए प्रतिमा को बहुत ही ध्यान से बनाया गया है।