पेगासस जासूसी, महंगाई, कृषि कानून समेत अन्य मुद्दों को लेकर विपक्ष के हंगामे के कारण बुधवार को लोकसभा की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी गयी। पीठासीन अधिकारी रमा देवी ने पांच बार के स्थगन के बाद शाम चार बजे छठी बार सदन की कार्यवाही को जैसे ही शुरू किया कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, वामदलों और शिरोमणि अकाली दल समेत विपक्षी पार्टियों के सदस्य हाथों में तख्तियां लेकर आसान के इर्द गिर्द जमा हो गए और नारेबाजी शुरू कर दी। श्रीमति देवी ने हंगामा कर रहे सदस्यों से अपनी सीट पर जाने का आग्रह करते हुए कहा, ''मैं बहुत आदर सम्मान के साथ आपको सीट पर जाने का आग्रह करती हूँ। आप जो कहना चाहते हैं वह सब सुनेंगें।'

पीठासीन अधिकारी के आग्रह का शोर शराबा कर रहे सदस्यों पर कोई असर नहीं हुआ लिहाजा हंगामा बढ़ता देख श्रीमति देवी ने सदन की कार्यवाही को गुरुवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। इससे पहले सदन की कार्यवाही चार बार के स्थगन के बाद तीन बजे शुरू हुई तो विपक्षी दलों के सदस्यों के हंगामे के बीच ही वित्त वर्ष 2021-22 के लिए पहली अनुपूरक अनुदान माँगों और उनसे जुड़े विनियोग विधेयक को बिना चर्चा के मंजूरी प्रदान कर दी गयी। इससे पूर्व अपराह्न 2:30 बजे सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो शोर शराबे के बीच ही इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (संशोधन) विधेयक 2021 को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। 

इसके बाद सदन में शोर शराबा बढ़ता देख पीठासीन अधिकारी राजेन्द्र अग्रवाल ने सदन की कार्यवाही को तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। पूर्वाह्न पीठासीन अधिकारी राजेंद्र अग्रवाल ने दो बार स्थगन के बाद दो बजे जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू की तो हंगामा कर रहे विपक्ष के सदस्य हाथों में तख्तियां लेकर सदन के बीचोंबीच आ गए और नारेबाजी करने लगे। श्री अग्रवाल ने सदस्यों से अपनी सीटों पर जाने का आग्रह करते हुए शून्यकाल जारी रखा। शून्यकाल में भाजपा के रोडमल नागर, किरीट भाई सोलंकी और राजू बिस्टा ने अपने-अपने क्षेत्रों से सम्बंधित लोक महत्व के मुद्दे उठाए लेकिन हंगामा अधिक बढऩे के कारण सदन की कार्यवाही को आधे घंटे के लिए स्थगित करनी पड़ी।

इससे पहले एक बार के स्थगन के बाद श्री अग्रवाल ने साढ़े बारह बजे विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच ही सदन की कार्यवाही चलाने की कोशिश की लेकिन सदन में इस दौरान विपक्षी सदस्यों ने शोर-शराबा जारी रखा। पीठासीन अधिकारी ने कहा कि यह सदन उन्हीं का है और इसमें उन्हें जनता के मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए लेकिन सदस्यों ने उनकी एक नहीं सुनी और हंगामा बढ़ता देख उन्होंने सदन की कार्यवाही दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी। पूर्वाह्न श्री अग्रवाल ने सदन के पटल पर हंगामे की बीच जरूरी दस्तावेज रखवाए। इस दौरान कई सदस्यों ने आसन के सामने कागज भी फेंके लेकिन पीठासीन अधिकारी ने हंगामे के बीच ही सदन की कार्यवाही जारी रखने का प्रयास किया। हंगामा बढ़ता गया तो उन्होंने साढ़े बारह बजे तक सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी। सुबह अध्यक्ष ओम बिरला ने भारी शोर-शराबे के बीच प्रश्नकाल चलाया प्रश्नकाल के दौरान भी आसन के सामने बैनर दिखाए गए और कागज फेंके गए।