महाराष्ट्र में मराठवाड़ा क्षेत्र के साथ-साथ खानदेश और विदर्भ क्षेत्रों सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों में पिछले 12 दिनों से लगातार बारिश नहीं होने से कपास, मक्का, मूंग, उड़द और सोयाबीन की फसल को नुकसान पहुंचा है। मानसून की अवधि चूंकि ढाई महीने से अधिक हो चुकी है, पूरे क्षेत्र में आठ जिलों में औसतन 479 मिमी बारिश दर्ज की गई है, लेकिन लंबे समय तक बारिश नहीं होने से फसलें खराब होने वाली हैं। 

अगस्त तक इस इलाके में 515 मिमी बारिश का अनुमान था। यदि वर्तमान स्थिति बनी रहती है और एक महीने और डेढ़ महीने की अवधि में बारिश नहीं होती तो स्थिति और खराब होगी। पिछले 12 दिनों से बारिश नहीं होने के कारण यहां के जलाशय भी पूरी तरह अभी नहीं भर पाये हैं। 

मानसून के शुरू में मराठवाड़ा में मध्यम बारिश हुयी थी, जिसके कारण किसानों ने अपने खेतों में बीज बो दिये थे। मराठवाड़ा के 49 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि में से 47 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि में कृषि की गयी है। पिछले 12 दिन से बारिश की कमी के कारण खड़ी फसलें बर्बाद हो रही हैं।