संयुक्त अरब अमीरात में इन दिनों भयंकर गर्मी पड़ रही है। हालत इतनी खराब है कि पारा 120 डिग्री फॉरेनहाइट यानी कि करीब 50 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा है। ऐसी प्रचंड गर्मी में तप रहे यूएई के लोग बारिश के लिए बुरी तरह तरस रहे थे। लेकिन बारिश की संभावना दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही थी। ऐसे में प्रशासन ने खुद ही कृत्रिम बारिश कराने का फैसला किया।

इंडिपेंडेंट की एक खबर के मुताबिक संयुक्त अरब अमीरात के मौसम विभाग ने रविवार को दुबई समेत देश के कई हिस्सों में भारी बारिश होने का वीडियो जारी किया बताया जा रहा है कि ये बारिश करने के लिए किए जा रहे क्लाउड सीडिंग ऑपरेशन का हिस्सा थी। इस मिशन में औसतन सिर्फ चार इंच बारिश कराई जा सकती है।

ये बढ़ी हुई बारिश ड्रोन तकनीक का उपयोग करके बनाई गई। इन तकनीक शॉक के जरिए बादलों को छोड़ा जाता है ताकि वे एक साथ टकरा सकें और बारिश कर सकें। खबर के मुताबिक भारी बारिश के कारण ऐल ऐन शहर में झरने बहने लगे और ड्राइविंग की स्थिति खतरनाक हो गई। 2017 में संयुक्त अरब अमीरात प्रशासन ने देश में कम होते जलस्तर को रोकने के प्रयास में वर्षा निर्माण परियोजनाओं में 1.5 करोड़ का निवेश किया था।

बादलों के इलेक्ट्रिक शॉक देने के लिए इस्तेमाल की जा रही मौजूदा प्रणाली का नेतृत्व इंग्लैंड में यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के शोधकर्ताओं द्वारा किया जा रहा है। प्रोजेक्ट पर काम करने वाले प्रोफेसर मार्टेन अंबाम ने मार्च में बीबीसी को बताया था कि यूएई में बारिश के लिए अनुकूल परिस्थितियों को बनाने के लिए पर्याप्त बादल हैं।

यह परियोजना पानी की बूंदों को आपस में मिलाने की कोशिश करती है और जब वे एक विद्युत पल्स प्राप्त करते हैं तो ये चिपक जाती है, "जैसे सूखे बालों से कंघी चिपकती है।" प्रोफेसर ने बताया कि जब ये बूंदें मिल जाती हैं और बड़ी हो जाती हैं तो वह बारिश की तरह बरसने लगती हैं।