कोरोना के खिलाफ जंग में डीआरडीओ काफी अहम योगदान कर रहा है।  डीआरडीओ ने राजधानी दिल्ली के एम्स और आरएमएल अस्पताल में मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट लगाने का काम शुरू कर दिया है और उम्मीद है कि दोनों प्लांट्स गुरूवार यानी 6 मई से ऑक्सीजन का उत्पादन करने लगेंगे। 

डीआरडीओ ने इस प्लांट को कोयम्बटूर की ट्राईटेंड नाम की कंपनी के साथ मिलकर लगाया है।  ये प्लांट वायुमंडल में मौजूद गैस से ऑक्सीजन का उत्पादन करता है और इसलिए लगातार काम कर सकता है।  ये प्रति मिनट 1000 लीटर ऑक्सीजन का उत्पादन करता है, जिससे एक दिन में करीब 190 मरीजों को पांच लीटर ऑक्सीजन की सप्लाई की जा सकती है। 

आपको बता दें कि इसमें वही तकनीक इस्तेमाल की गई है, जो भारत के पहले स्वनिर्मित एयरक्राफ्ट तेजस के लिए डेवलप की गई थी।  बेहद ऊंचाई पर उड़ान भरने वाले चालक दल और तेज रफ्तार जेट में बैठे फाइटर पायलट्स को ये सिस्टम लगातार जरूरी ऑक्सीजन पहुंचाता है।  यह तकनीक अब इंडस्ट्री को भी दे दी गई है, जिसमें टाटा, एलएंडटी आदि शामिल हैं। 

डीआरडीओ अगले तीन महीने के भीतर देशभर में ऐसे 500 ऑक्सीजन प्लांट लगाने जा रहा है।  इसका पूरा खर्च पीएम केयर्स फंड के खाते से दिया जा रहा है। डीआरडीओ चीफ सतीश रेड्डी ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय जहां कहेगा, वहां हम इसे लगाएंगे।  इसे छोटे अस्पताल में भी लगाया जा सकता है और 500 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन का उत्पादन हो सकता है।  इसका खर्च करीब 40 लाख से 80 लाख रुपये है। 

उधर, लखनऊ में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की पहल पर बना डीआरडीओ का अस्थाई अस्पताल बुधवार दोपहर से शुरू हो गया है।  इस अस्पताल में कोविड कमांड सेंटर की ओर से रेफर किए गए 500 मरीजों को भर्ती किया जा सकता है।  वहीं डीआरडीओ के सहयोग से गुजरात के अहमदाबाद में बने 900 बेड का अस्पताल शनिवार से शुरू हो गया है।  इस अस्पताल में 150 आईसीयू और 750 ऑक्सीजन से लैस बेड हैं।  बनारस में दो-तीन दिनों के भीतर और मध्यप्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड में जल्द ऐसे अस्पतालों की शुरूआत होगी।