भारत ने अब तक सबसे घातक राइफल बनाई जिससें सेना के जवान अब एक मिनट में 700 गोलियां दाग सकेंगे।
इसी के साथ ही रक्षा क्षेत्र में भारत के हाथ और मजबूत हो गए हैं। इस खतरनाक राइफल को डीआरडीओ ने बनाया है और यह सेना के सभी मानकों पर खरी उतरी है। भारतीय रक्षा अनुसंधान संगठन रक्षा क्षेत्र में भारत को लगातार सबल बना रहा है।
डीआरडीओ की बनाई गई यह कार्बाइन सेना के इस्तेमाल के लिए अब बिल्कुल तैयार है। इस कार्बाइन का पहला मकसद बिना किसी दुर्घटना के टारगेट को निष्क्रिय करना है। संगठन ने इसे जेपीपीसी यानी जॉइंट वेन्चर प्रोटेक्टिव कार्बाइन नाम दिया है। यह कार्बाइन सबसे पहले पुरानी हो चुकी 9 एमएम कार्बाइन को रिप्लेस करेगी। इसके अलावा सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेस जैसे सीआरपीएफ और बीएसएफ को भी आधुनिक हथियार मुहैया कराएगी।

इस कार्बाइन को डीआरडीओ की पुणे लैब और ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड ने मिलकर बनाया हैण् सबसे बड़ी बात इस आधुनिक हथियार ने पहले ही ट्रायल्स को पूरा कर लिया है।
जेवीपीसी एक गैस चालित सेमी ऑटोमेटिक हथियार हैण् कार्बाइन का बैरल राइफल से छोटा होता है। इसे भारतीय सेना जनरल स्टाफ क्वालिटेटिव रिक्वायरमेंट के आधार पर तैयार किया गया था। यह कार्बाइन डीआरडोओ की पुणे स्थित लैब आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट में भारतीय सेना के आधार पर डिजाइन की गई है।

ये जेवीपीसी गैस ऑपरेटेड 5.56 गुणा 30 एमएम हथियार है। जेवीपीसी को कभी कभी मॉडर्न सब मशीन कार्बाइन भी कहा जाता है जो हर मिनट 700 राउंड फायर कर सकती है।