Corona वायरस संक्रमितों के इलाज के लिए डीआरडीओ की बनाई 2-डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज (2-DG) दवा के आपातकालीन इस्तेमाल को मंजूरी मिल चुकी है। हालांकि, अभी भी इस दवा को लेकर कई सवाल हैं जैसे यह दवा कौन ले सकता है, किस तरह के मरीजों में इसके इस्तेमाल से कितना फायदा हो रहा है। अब डीआरडीओ ने इसके इस्तेमाल को लेकर निर्देश जारी किए हैं। डीआरडीओ ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया है यह दवा डॉक्टरों के सुझाव और निगरानी के अंदर कोविड-19 मरीजों को दी जा सकती है।

यह दवा डीआरडीओ ने रेड्डीज लैबोरेट्रीज के साथ मिलकर बनाई है। डीआरडीओ की यह दवा एक पाउच में पाउडर के रूप में आती है, जिसे पानी में घोलकर मुंह से मरीज को पिलाया जाता है। डीआरडीओ की यह दवा एक पाउच में पाउडर के रूप में आती है, जिसे पानी में घोलकर मुंह से मरीज को पिलाया जाता है। यह वायरस से संक्रमित कोशिकाओं में जमा हो जाती है और वायरल के ऊर्जा उत्पादन को रोककर वायरस के विकास को रोकती है। यह दवा उन मरीजों के लिए वरदान के रूप में है, जोकि ऑक्सीजन पर काफी निर्भर हैं।

>>डीआरडीओ ने ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया की ओर से मान्य निर्देशों जारी किए हैं। इसके मुताबिक, यह दवा उन कोरोना मरीजों को दी जा सकती है जो अस्पताल में भर्ती हैं।

>>यह दवा कोरोना संक्रमण के पहले 10 दिनों के अंदर या उससे पहले मरीज को दी जानी चाहिए।

>>अनियंत्रित डायबिटीज, गंभीर हृदय रोग वाले मरीज, एआरडीएस, कमजोर गुर्दे वाले मरीजों पर अभी तक 2 डीजी दवा का परीक्षण नहीं किया गया है। इसलिए इन लोगों को यह दवा नहीं देनी चाहिए।

>>2 डीजी दवा गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भी नहीं दी जानी चाहिए। इसके अलावा 18 साल से कम आयु के किशोर-किशोरियों को भी यह दवा नहीं दी जानी चाहिए।

>>मरीजों/परिजनों को अगर यह दवा चाहिए तो वह अपने अस्पताल से आपूर्ति के लिए हैदराबाद स्थित डॉक्टर रेड्डी लैब से संपर्क करने को कहें।