कोरोना के खिलाफ जारी लड़ाई के लिए डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) के हैदराबाद स्थित डॉ. रेड्डी लैब्स संग मिलकर बनाई गई दवा 2 डियोक्सी-डी-ग्लूकोज (2डीजी) की कीमत को तय कर दिया गया है। पैकेट में आने वाली इस दवा का दाम लोगों के लिए 990 रुपये रखा गया है, जबकि केंद्र और राज्य सरकारों का यह दवा कम कीमत पर उपलब्ध होगी। आम लोगों के लिए एक पैकेट 990 रुपये का होगा।

ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) ने हाल ही में कोरोना के खिलाफ इस दवा के इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए मंजूरी दी थी। डीआरडीओ का दावा है कि इस दवा के बाद मरीजों की ऑक्सीजन पर निर्भरता को कम किया जा सकेगा। दूसरी लहर में कोरोना मरीजों को सबसे ज्यादा ऑक्सीजन की ही जरूरत पड़ी थी। डीसीजीआई के मंजूरी के बाद रक्षा मंत्रालय ने कहा था, ''दवा के क्लीनिकल ट्रायल रिजल्ट्स में दिखाई देता है कि यह अस्पतालों में भर्ती मरीजों को जल्दी ठीक करती है। साथ ही उनकी ऑक्सीजन पर निर्भरता को भी कम करती है। 2-डीजी दवा के इस्तेमाल के बाद कोरोना मरीज अन्य की तुलना में कम दिनों में ही ठीक हो गए। कोविड-19 से संक्रमित लोगों का इस दवा से काफी लाभ होगा।''
डीआरडीओ की यह दवा एक पाउच में पाउडर के रूप में आती है, जिसे पानी में घोलकर मुंह से मरीज को पिलाया जाता है। यह वायरस से संक्रमित कोशिकाओं में जमा हो जाती है और वायरल के ऊर्जा उत्पादन को रोककर वायरस के विकास को रोकती है। यह दवा उन मरीजों के लिए वरदान के रूप में है, जोकि ऑक्सीजन पर काफी निर्भर हैं।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन सिंह ने 17 मई को 2-डीजी दवा के पहले बैच को लॉन्च किया था। वहीं, डीआरडीओ ने एक और कारनामा करके दिखाया है। इसने हाल ही में कोरोना वायरस एंटीबॉडी डिटेक्शन किट तैयार की है। इस किट का नाम 'DIPCOVAN' रखा गया है। इसके जरिए SARS-CoV-2 वायरस के साथ-साथ न्यूक्लियोकैप्सिड प्रोटीन का भी 97% की उच्च संवेदनशीलता और 99% की विशिष्टता के साथ पता लगाया जा सकता है। इसे दिल्ली स्थित वैनगार्ड डायग्नोस्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से विकसित किया गया है। यह किट पूरी तरह स्वदेशी है और इसे यहीं के वैज्ञानिकों ने विकसित किया है।