समस्तीपुर। जन सुराज अभियान के संस्थापक एवं राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने बिहार में महागठबंधन सरकार की स्थिरता पर संदेह जाहिर करते हुए आज कहा कि ऐसा नहीं लगता है कि सात दलों का यह महागठबंधन अगले विधानसभा और लोकसभा चुनाव तक चलेगा। किशोर जन सुराज अभियान के तहत गुरुवार को यहां पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अपने शासनकाल में 10 लाख सरकारी नौकरी देने की बात कभी ध्यान में नहीं आई। लेकिन आज महागठबंधन की सरकार बनते ही मुख्यमंत्री को इसका ध्यान कैसे आ गया। 

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नीतीश सरकार यदि एक वर्ष के अन्दर 10 लाख नौकरी देने का जो वादा किया है उसे पूरा करती है तो उनका संगठन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समर्थन मे काम करेगा। राजनीतिक रणनीतिकार ने बिहार में बनी महागठबंधन की सरकार पर स्थिरता पर संदेह जाहिर करते हुए कहा कि ऐसा नहीं लगता है कि यह महागठबंधन अगले विधानसभा और लोकसभा चुनाव तक चलेगा। 

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उन्होंने कहा, 'संभव है कि लोकसभा चुनाव तक ये लोग साथ रहे लेकिन 2025 मे होनेवाली बिहार विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन बिखर न जाए।' प्रशांत ने कहा कि साल 2012 के बाद से बिहार में सरकार बनाने का ये छठवां प्रयोग है जिससे सरकार बदली है। इस तरह सरकार बनाने से बिहार के विकास पर बुरा असर पड़ा है और विकास की गति धीमी हुई है। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की आलोचना करते हुए कहा कि वह कुर्सी से चिपकु मुख्यमंत्री है। उन्होंने कहा कि साल 2014 के नीतीश कुमार और आज 2022 के नीतीश कुमार में जमीन-आसमान का फर्क है और यह उनकी पार्टी जनता दल यूनाईटेड के चुनावी प्रदर्शन में साफ तौर पर देखा जा सकता है।