अगर आप नौकरी करते हैं और निवेश के नए विकल्प की तलाश में हैं तो वॉलंटरी प्रोविडेंट फंड (VPF) आपके लिए अच्छा विकल्प साबित हो सकता है। इस स्कीम में जहां पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) से ज्यादा ब्याज मिल रहा है। वहीं इसमें निवेश किए गए आपके पैसे PPF से 9 महीने पहले डबल होता है।VPF में निवेश करने के लिए आपको अलग से कोई खाता खोलने की जरूरत नहीं है। इसके अलावा इस पर मिलने वाला ब्याज 80C के तहत टैक्स फ्री भी है।

वॉलंटरी प्रोविडेंट फंड (VPF) कर्मचारी भविष्य निधि (EPFO) की ही एक योजना है। इस योजना के तहत लाभ लेने वाले कर्मचारी अपनी इच्‍छा से अपने वेतन का कोई भी हिस्सा वॉलंटरी प्रोविडेंट फंड खाते में योगदान कर सकता है। यह योगदान सरकार द्वारा अनिवार्य 12 फीसदी पीएफ की अधिकतम सीमा से अधिक होना चाहिए। आपको बता दें कि कंपनी वीपीएफ की ओर से किसी भी राशि का योगदान करने के लिए बाध्‍य नहीं है। PF के लिए अलग से खाता खोलने की जरूरत नहीं है। एक कर्मचारी अपने मूल वेतन और डीए का 100 फीसदी योगदान वीपीएफ में दे सकता है।

 इस पर ब्‍याज दर ईपीएफ के समान होगी और यह राशि ईपीएफ योजना के खाते में जमा की जाएगी, क्‍योंकि VPF के लिए कोई अलग खाता नहीं हैवॉलंटरी प्रोविडेंट फंड पर इस समय PPF के मुकाबले अधिक ब्याज मिल रहा है। PPF पर इस समय 8% तो VPF पर 8.65% ब्याज मिल रहा है। प्राइवेट कंपनियों ने भी VPF को ऑनलाइन कर दिया है तो आपके लिए निवेश आसान है। आप इसमें अपना निवेश घटा-बढ़ा सकते हैं और कभी भी इसे बंद करा सकते हैं।हालांकि इसमें पैसा लॉक हो जाता है। PPF में आप जहां एक साल में अधिकतम 1.50 लाख रुपये तक ही निवेश करने की सीमा। वहीं VPF में निवेश करने की कोई सीमा नहीं है। इसमें आप कितना भी निवेश कर सकते हैं।

आप इसमें से पैसा तभी निकाल सकते हैं जब आप रिटायर हों या फिर नौकरी छोड़ दें। फाइनेंस का यह खास नियम है रूल ऑफ 72। एक्सपर्ट्स इसे सबसे सटीक रूल मानते हैं, जिससे यह तय किया जाता है कि आपका निवेश कितने दिनों में डबल हो जाएगा। इसे आप ऐसे समझ सकते हैं कि अगर आपने PPF में निवेश किया और यहां आपको सालाना 8% ब्याज मिलता है।