गुजरात के आकार जितना बड़ा बर्फ का पहाड़ टूटने जा रहा है जिस वजह से करोड़ों लोगों पर आफत आ सकती है। यह एक बर्फ का ग्लेशियर है जो लगभग गुजरात के क्षेत्रफल के बराबर है। यह ग्लेशियर समुद्र के अंदर कई किलोमीटर की गहराई तक डूबा हुआ है। लेकिन अब यह चिंता का विषय बन चुका है। क्योंकि यह बड़ी तेजी से टूटकर पिघल रहा है। यदि ऐसा हुआ तो पूरी दुनिया के सभी समुद्रों का जलस्तर 2 से लेकर 5 फीट तक बढ़ जाएगा।

इस ग्लेशियर का नाम थ्वायटेस (Thwaites) है जो अंटार्कटिका के पश्चिमी छोर पर स्थित है। इसको डूम्स-डे ग्लेशियर भी कहा जाता है। इसका मतलब ये है कि वो ग्लेशियर जो कयामत वाले दिन पिघलेगा। लेकिन चिंता बढ़ती जा रही है क्योंकि पिछले 30 सालों में इसके पिघलने की दर दोगुनी हो चुकी है।

थ्वायटेस (Thwaites) ग्लेशियर का क्षेत्रफल 192,000 वर्ग किलोमीटर है यानी यह गुजरात के क्षेत्रफल 196,024 वर्ग किलोमीटर से थोड़ा छोटा है। इस ग्लेशियर समुद्र के अंदर चौड़ाई 468 किलोमीटर है और इससें लगातार बड़े-बड़े आइसबर्ग टूट रहे हैं। यूके में स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सटर के प्रोफेसर अली ग्राहम ने बताया कि हाल ही में इस ग्लेशियर में छेद किया गया। इस छेद के जरिए एक रोबोट को इस ग्लेशियर के अंदर भेजा गया। तब इस बात का पता चला कि समुद्र के अंदर से यह ग्लेशियर बहुत तेजी से टूट रहा है। इसके अंदर ग्रेट ब्रिटेन के आकार का छेद हो चुका है।

अगर यह ग्लेशियर टूटा तो दुनियाभर के समुद्रों का जलस्तर 2 से 5 फीट बढ़ जाएगा। इसका असर पूरी दुनिया के तटीय इलाकों पर पड़ेगा और मालदीव जैसे कई द्विपीय देश पानी में समा जाएंगे।

बताया गया है कि यह ग्लेशियर साल 2100 तक पूरा पिघल गया तो 12 विकासशील देशों की करीब 9 करोड़ आबादी को रहने के लिए नई जगह तलाशनी होगी। इतने बड़े पैमाने पर लोगों का विस्थापन दुनियाभर के देश बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे। इस वजह से कई देशों की आर्थिक स्थिति खराब हो जाएगी।

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