नगालैंड में अगले महीने विधानसभा चुनाव है । 27 फरवरी को वोट डाले जाएंगे । 3 मार्च को विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होंगे । विधानसभा चुनाव की घोषणा होते ही राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है । 

नागालैंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान शुक्रवार को धार्मिक कार्ड खेला । कांग्रेस की स्टेट यूनिट ने भाजपा और नेशनल डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी( एनडीपीपी ) के संभावित गठबंधन पर तंज कसते हुए इसे ईसाई समुदाय का प्रत्यक्ष अपमान करार दिया । 

पार्टी की मीडिया सेलने कहा, एनडीपीपी और भाजपा का गठबंधन के लिए करीब आना और विधानसभा चुनाव लडना ईसाई समुदाय की भावनाओं का सीधे सीधे अपमान है । चूकि भाजपा को ईसाईयों पर अत्याचार करने के लिए जाना जाता है, ऐसे में किसी भी ईसाई को ईसाईयों पर अत्याचार या भाजपा-एनडीपीपी गठबंधन के लिए वोट नहीं करना चाहिए ।

कांग्रेस ने धर्मनिरपेक्ष मानसिकता वाले दलों से पार्टी से हाथ मिलाने के अपील की है ।  साथ ही लोगों को  सांप्रदायिक ताकतों के चंगुल से बचाने को कहा है । आपको बता में कि कांग्रेस नगालैंड में 2003 से सत्ता से बाहर है । कांग्रेस ने दावा किया कि पार्टी ने हाल ही में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए एनडीपीपी के साथ अंडरस्टैंडिंग बनाई थी क्योंकि एनडीपीपी ने घोषणा भी की  थी कि वह सांप्रदायिक ताकतों का साथ नहीं देगी ।

 

नागालैंड से एक मात्र लोकसभा सांसद व तीन बार प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे एन रियों के एनडीपीपी में शामिल होने से पहले पार्टी ने बहुत स्पष्ट और जोर देकर कहा था कि वे सांप्रदायिक ताकतों से हाथ नहीं मिलाएंगे और धर्मनिरपेक्ष विचारधारा पर ही चलेंगे । 

इसके बाद हमारे बीच कछ अंडरस्टैंडिंग बनी थी कि या तो गठबंधन करेंगे या एनडीपीपी का कांग्रेस में विलय होगा । कांग्रेस ने कहा कि पार्टी अकेले ही सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ जंग लड़ रही है । 

नागालैंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने रियो पर आरोप लगाया है कि उनकी वजह से की भाजपा को नगालैंड में अपने पैर पसारने का मौका मिला । जब वह राज्य के मुख्यमंत्री थे तब भाजपा को नगालैंड में अपने पैर जमाने का मौका दिया । आपको बता दें कि रियो हल ही में नगा पीपुल्स फ्रंट( एनपीएफ ) छोड़कर एनडीपीपी में शामिल हुए है ।