मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने कहा है कि तीन तलाक विधेयक का मकसद महिलाओं को बराबरी का हक और न्याय दिलाना है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय के लिए की गयी इस व्यवस्था से वह काफी खुश हैं। यह विधेयक मुस्लिम महिलाओं को सशक्त करेगा तथा उन्हें न्याय दिलाएगा। सिंह ने तीन तलाक विधेयक के राज्यसभा में पारित होने पर खुशी जाहिर की।

इस विधेयक के संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद अब यह आपराधिक कृत्य हो गया है। अगर कोई मुस्लिम पति अपनी पत्नी को तीन तलाक देता है तो उसे कानूनन जुर्म माना जाएगा जिसके तहत उसे तीन वर्ष की सजा हो सकती है। पहले यह विधेयक लोकसभा में पेश किया गया था और यह पिछले सप्ताह निचले सदन से पारित हो गया था। संसद के दोनों सदनों से विधेयक पारित होने के बाद अब इसे राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।


गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय ने 2017 में तीन तलाक को गैरकानूनी करार दिया था। तीन तलाक विधेयक पारित होने पर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया और कहा कि इस विधेयक के पारित होने बाद अब यह प्रथा इतिहास बन जाएगी।


बिप्लब ने दिया पीड़ित महिलाओं को सहायता का भरोसा
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने राज्य की पीड़ित मुस्लिम महिलाओं को मदद का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा पीड़ित महिला तीन तलाक के मुद्दे पर मुझसे सीधे मिलकर अपनी समस्याएं बता सकती हैं। मैं उनकी समस्याओं को प्राथमिकता के साथ हल करने की कोशिष करूंगा। इसके साथ ही पीड़ित महिलाएं मुख्यमंत्री कार्यालय में फोन (0381-241 5555) भी कर सकती हैं।

पिछली लोकसभा में पास नहीं हो पाया था विधेयक
पिछली लोकसभा में दो बार यह विधेयक अलग-अलग स्वरूपों में पारित किया गया था, लेकिन राज्यसभा में पेश नहीं किया जा सका। नयी लोकसभा के गठन के बाद इसे नये सिरे से सदन में लाना पड़ा। विधेयक में प्रावधान है कि तीन तलाक देने वाले आरोपी के खिलाफ सिर्फ पीड़िता, उससे खून का रिश्ता रखने वाले और विवाह से बने उसके रिश्तेदार ही प्राथमिकी दर्ज करा पायेंगे। आरोपी पति को मजिस्ट्रेट द्वारा जमानत मिल सकती है। पीड़िता को सुनने के बाद मजिस्ट्रेट को यथोचित शर्तों पर सुलह कराने का भी अधिकार दिया गया है।


पूर्वोत्तर राज्यों में भी बढ़ी तीन तलाक की घटनाएं
आपको बता दें कि मुस्लिम महिलाओं को तीन बार तलाक बोलकर छोड़ देने की घटनाएं पूरे भारत में हो रही हैं। पूर्वोत्तर के उन राज्यों में भी मुस्लिम महिलाओं के साथ ऐसी घटनाओं की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। असम, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम तथा नागालैंड में ऐसी घटनाएं काफी हुई हैं जिसके चलते पीड़िताएं न्याय की गुहार लगाती फिर रही थी। हालांकि अब उनके साथ न्याय होगा।