इस्लामाबाद। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने शुक्रवार को कहा कि वह नेशनल असेंबली को बहाल किए जाने के संबंध में गुरुवार को जारी देश के उच्चतम न्यायालय के फैसले से निराश हैं। उन्होंने कहा, 'मैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले से निराश हूं, लेकिन इसे स्वीकारता हूं।' इमरान ने कहा कि वह नेशनल असेंबली के डिप्टी स्पीकर कासिम सूरी द्वारा उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को खारिज किए जाने और उनकी सलाह पर राष्ट्रपति आरिफ अल्वी द्वारा संसद के निचले सदन को भंग किए जाने को शीर्ष न्यायालय द्वारा असंवैधानिक करार दिए जाने की बात से निराश हैं। 

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पीएम ने कहा, शीर्ष अदालत को फैसला सुनाने से पहले कम से कम 'धमकी भरे पत्र' पर गौर फरमाना चाहिए था। उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान में अविश्वास प्रस्ताव को लाया जाना एक विदेशी साजिश थी। मैं चाहता था कि सुप्रीम कोर्ट कम से कम इस पर गौर करें क्योंकि यह एक बेहद ही गंभीर आरोप है कि कोई एक बाहरी ताकत अपनी रची साजिश के जरिए सरकार को गिराना चाहती है।' जियो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तानी राजदूत और अमेरिकी अधिकारी के बीच बैठक के दौरान अमेरिका ने कहा था कि मुझे (इमरान खान) को रूस का दौरा नहीं करना चाहिए था। प्रधानमंत्री ने दावा किया कि अमेरिकी अधिकारी ने पाकिस्तानी राजदूत को चेतावनी दी थी कि अगर इमरान खान खुद को अविश्वास प्रस्ताव से बचाने में कामयाब रहे, तो पाकिस्तान को 'गंभीर परिणाम' भुगतने होंगे। 

अमेरिकी अधिकारी के दंभ के लिए उसकी आलोचना करते हुए खान ने आरोप लगाया कि अधिकारी ने राजदूत से कहा कि इमरान अगर पद से बेदखल भी हो जाए तो भी पाकिस्तान को बख्शा नहीं जाएगा चाहें सत्ता की डोर किसी और के हाथ ही क्यों न हो। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, 'उन्होंने (अमेरिका) यह महसूस किया है कि मैं ड्रोन हमलों और इराक में युद्ध के खिलाफ आवाज उठा रहा हूं, लेकिन वे मुझे अपने काबू में नहीं रख सकते हैं इसलिए ये सब नाटक किया जा रहा है ताकि मुझे रास्ते से हटाया जा सके।' आखिर में पीएम ने नई सरकार के सत्ता में आने पर अपने समर्थकों से सड़कों पर उतरकर देश भर में विरोध प्रदर्शन करने को कहा। 

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उन्होंने कहा, 'मैं देश में किसी भी'आयातित सरकार' को स्वीकार नहीं करूंगा।' उल्लेखनीय है कि गुरुवार को पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने विधानसभा को भंग करने के सरकार के फैसले और नेशनल असेंबली के डिप्टी स्पीकर कासिम सूरी के फैसले को असंवैधानिक करार देते हुए इसे बहाल कर दिया। इसके अलावा, अदालत ने निचले सदन के अध्यक्ष कासिम सूरी को अविश्वास प्रस्ताव पर मतविभाजन के लिए 9 अप्रैल को सुबह 10 बजे (स्थानीय समयानुसार) नेशनल असेंबली का सत्र बुलाने और अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर नये प्रधानमंत्री का चुनाव कराने का आदेश दिया है।