दो बार के विश्व कप विजेता भारत के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने शनिवार को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहकर पिछले एक साल से उनके भविष्य को लेकर लग रही अटकलों पर विराम लगा दिया। 

गैर पारंपरिक शैली में कप्तानी और मैच को अंजाम तक ले जाने की कला के साथ महानतम क्रिकेटरों की जमात में खुद को शामिल करने वाले धोनी के इस फैसले के साथ ही क्रिकेट के एक युग का भी अंत हो गया। धोनी के इस फैसले पर भारत के दिग्गज क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर और वीरेंद्र सहवाग और बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली ने रिऐक्शन दिया है।

सचिन ने ट्वीट करते हुए कहा कि, 'तुम्हारा भारतीय क्रिकेट में योगदान अभूतपूर्व है। 2011 में विश्व कप जीतना मेरा जिंदगी का सबसे खास पल है। आपको और आपके परिवार को दूसरी पारी के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएं।'

वीरेंद्र सहवाग ने ट्वीट करते हुए लिखा कि, 'तुम्हारे जैसा न कोई था, न कोई है और न कोई होगा। खिलाड़ी आते-जाते रहते हैं लेकिन उनके जैसा शांत खिलाड़ी कोई भी नहीं होगा। धोनी उनके साथ ऐसे जुड़ते हैं जैसे वो उनके फैमिली मेंबर हों।' ओम फिनिशाय नम:.. 

धोनी के संन्यास पर बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली ने कहा है कि यह एक युग का अंत हो गया है। धोनी भारतीय क्रिकेट और विश्व क्रिकेट के लिए एक बेहतरीन खिलाड़ी साबित हुए हैं। उनकी कप्तानी की खासियत ऐसी है जिसको मैच करना काफी मुश्किल होगा, खास लिमिटेड ओवर क्रिकेट में। 

उन्होंने वनडे क्रिकेट में पांचवें से सातवें नंबर के बीच में बल्लेबाजी के बावजूद 50 से अधिक की औसत से 10773 रन बनाए। टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने 38.09 की औसत से 4876 रन बनाए और भारत को 27 से ज्यादा जीत दिलाई। आंकड़ों से हालांकि धोनी के कैरियर ग्राफ को नहीं आंका जा सकता। धोनी की कप्तानी, मैच के हालात को भांपने की क्षमता और विकेट के पीछे जबर्दस्त चुस्ती ने पूरी दुनिया के क्रिकेटप्रेमियों को दीवाना बना दिया था।

वह कभी जोखिम लेने से पीछे नहीं हटे। इसलिए 2007 टी-20 विश्व कप का आखिरी ओवर जोगिंदर शर्मा जैसे नए गेंदबाज को दिया और 2011 वनडे विश्व कप के फाइनल में फॉर्म में चल रहे युवराज सिंह से पहले बल्लेबाजी के लिए आए। दोनों बार भारत ने खिताब जीता और धोनी देशवासियों के नूरे नजर बन गए। आईपीएल में तीन बार चेन्नई को जिताकर वह 'थाला' कहलाए।