कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी शुक्रवार को आयुष्मान योग और चित्रा नक्षत्र में शुरू होने वाला दीपोत्सव पर्व 43 साल बाद पांच दिन के बजाय इस बार चार दिवसीय बनेगा। शुक्रवार को धनतेरस का पर्व, धन्वंतरि जयंती, हनुमान जयंती और यम चतुर्दशी और छोटी दिवाली मनाई जाएगी। बाजार विशेष थीम पर रोशनी से सरोबार नजर आ रहे हैं। वहीं कोरोना काल के मद्देनजर इस बार व्यापारी भी ग्राहकों को दो गज की दूरी की पालन और मास्क लगाने की अपील करेंगे। धनतेरस का अबूझ मुहूर्त होने से वाहन, बर्तन, चांदी के आभूषण सहित अन्य खरीदारी करना शुभ रहेगा।

इसलिए तेरस और चतुर्दशी एक दिन

ज्योतिषाचार्य का कहना है कि शास्त्रानुसार धनतेरस प्रदोष व्यापिनी त्रयोदशी में मनाई जाती है। अत: इस बार त्रयोदशी शुक्रवार को शाम छह बजे तक रहकर इसके बाद चतुर्दशी शुरू हो जाएगी। अत: शुक्रवार को प्रदोष यानि शाम के समय त्रयोदशी और चतुर्दशी दोनों व्याप्त रहेगी। धनतेरस और रूप चतुर्दशी का दीपदान इसी दिन होगा। रूप चतुर्दशी के निमित होने वाला प्रभात स्नान और दीपदान दिवाली के दिन शनिवार सूर्योदय से पूर्व प्रात: 5.28 बजे होने वाले चंद्रोदय के साथ संपन्न होगा। 

इससे पहले 1977 में चार दिवसीय दीपोत्सव मनाया गया था। धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा अर्चना की जाएगी। वहीं आयुर्वेद औषधालयों में शिविर लगाए जाएंगे। पं. सुधाकर पुरोहित ने बताया कि धनत्रयोदशी के दिन सुबह धन्वंतरि का पूजन कर आरोग्य की कामना करें। इस दिन समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लिए अवतरित हुए थे। अपराह्न काल में धातु के बर्तन एवं सोने-चांदी आदि के आभूषण खरीदना विशेष फलदायी रहेगा।

शुक्रवार को ही धनतेरस और छोटी दिवाली

धनतेरस का दीपदान : प्रदोष काल-शाम 5.33 बजे से 6 बजे तक।

इसी दिन यम चतुर्देशी के निमित्त दीपदान शाम 6 बजे बाद होगा।

शुक्रवार धनतेरस को खरीदारी के मुहूर्त

चर का चौघडिय़ा— सुबह 6.49 बजे से 8.09 बजे तक

लाभ का— सुबह 8.09 बजे से 9.29 बजे तक

अमृत का— सुबह 9.29 से 10.50 बजे तक

शुभ का— दोपहर 12.11 बजे 1.31 बजे तक शुभ

चर का— शाम 4.12 से शाम 5.33 बजे

- उक्त समयावधि में चांदी के सिक्के बर्तन, चांदी के आभूषण, वाहन खरीद, भूमि पूजन सहित अन्य शुभ कार्य किए जा सकते हैं 

वहीं धन की देवी माता लक्ष्मी, भगवान गणेश की आराधना का पर्व दिवाली सर्वार्थसिद्धि योग, अनुराधा नक्ष और शोभन योग में शनिवार को मनाया जाएगा। 57 साल बाद इस पर्व पर शनि मकर राशि में और बृहस्पति धनु राशि या मीन राशि में होने और सूर्य तुला राशि में होने से ग्रहों का दुर्लभ संयोग रहेगा। वहीं रविवार को गोवर्धन पूजा, अन्नकूट और 16 नवंबर को भैया दोज का पर्व मनाया जाएगा।