हेलिकॉप्टर दुर्घटनाओं के लिए डीजीसीए की रिपोर्ट में पवन हंस को दोषी ठहराया गया है। इसके पीछे ऑपरेटर द्वारा सुरक्षा नियमों का अनुपालन नहीं करना और अनुचित रखरखाव सहित कई कारण बताए गए हैं। पिछले 30 सालों में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) द्वारा पवन हंस हेलीकॉप्टर लिमिटेड (पीएचएचएल) से जुड़े 20 से 25 दुर्घटनाओं पर तैयार की गई जांच रिपोर्टों में इसका खुलासा हुआ है। साल 1988 से इन दुर्घटनाओं में 91 लोग मारे गए, जिसमें 60 यात्री, 27 पायलट और चार दल शामिल थे।

द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक रिपोर्ट इस ओर इशारा करती है पवन हंस हेलीकॉप्टर लिमिटिड ने सुरक्षा मानकों के उल्लंघन किया। रिपोर्ट में इस ओर भी ध्यान दिलाया गया है कि पवन हंस हेलीकॉप्टर से जुड़ी ज्यादातर दुर्घटनाएं संगठनात्मक खामियों के कारण नहीं बल्कि तकनीकी कारणों की वजह से हुई हैं।


बता दें कि अरुणाचल प्रदेश में साल 2010 में हुई हेलीकॉप्टर हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। हादसे की जांच रिपोर्ट में सामने आया कि आगे बैठे यात्री का गेट खुल जाने पर उसे बंद करने की कोशिश के दौरान क्रू मैंबर हेलीकॉप्टर से गिर गया था। वहीं साल 2011 में हेलीकॉप्टर हादसों में 31 लोगों की जान गई। मृतकों में अरुणाचल प्रदेश के तत्कालीन सीएम दोरजी खांडू भी शामिल थे। 2010 से लेकर 2012 के बीच 12 हेलीकॉप्टर हादसे हुए, जिसमें से 10 पवन हंस के हेलीकॉप्टर थे। इन हादसों में 55 लोगों की जान गई थी। साल 1988 से लेकर अब तक पवन हंस इस तरह के हादसों में 21 हेलीकॉप्टर खो चुका है।


दूसरी तरफ पवन हंस के ऑपरेश्नल और टेक्निकल कार्यकारी निदेशक और एयर कमोडोर के प्रवक्ता ने टी ए विद्यासागर ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पवन हंस एक सरकारी संस्थान है, जिस पर मुश्किल भरे स्थानों पर उड़ाने भरने का भी सामाजिक उत्तरदायित्व है। उन्होंने कहा कि कंपनी ने कई सुरक्षा मानकों को अपनाया है और जवाबदेही को सुनिश्चित करने के लिए दो स्वतंत्र निदेशकों को अपने बोर्ड में लिया है।