राज्यसभा में देश के विभिन्न हिस्सों में आयी बाढ़ से प्रभावित लोगों को तुरंत मदद देने की मांग की गयी। सदन में शून्यकाल के दौरान असम, उत्तर प्रदेश और हरियाणा से संबद्ध सांसदों ने बाढ़ पीड़ितों का मामला उठाया और कहा कि सरकार को तुरंत मदद देने के उपाय करने चाहिए। 

असम से कांग्रेस के भुवनेश्वर कलिता ने कहा कि राज्य के ऊपरी इलाके बाढ़ की चपेट में हैं। उन्होंने कहा कि यह बाढ़ प्राकृतिक नहीं है, बल्कि एनएचपीसी ने अपने बांध से पानी छोड़ दिया है। लोगों को पहले से इसकी सूचना भी नहीं दी गयी। इससे राज्य में जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि इस मामले में केंद्र सरकार को कार्रवाई करनी चाहिये और प्रभावितों को मुआवजा देना चाहिये। 

उत्तरप्रदेश से समाजवादी पार्टी के सुखराम सिंह यादव ने कहा कि राज्य की नदियां उफान पर है और कई जिलों के सैंकड़ों गांव पानी में डूब गये हैं। लोगों के पास प्रभावित क्षेत्रों से बाहर जाने का विकल्प नहीं है। गंगा, यमुना, घाघरा और गोमती नदियों का जलस्तर बढ़ा है और इन नदियों के आसपास के क्षेत्रों के लोग पीड़ित हैं। उनके काम धंधे बंद हो गये हैं और खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद हो गयी हैं। सरकार को तुरंत इस ओर ध्यान देना चाहिए और लोगों को मुआवजा देने के उपाय किये जाने चाहिए। 

हरियाणा से कांग्रेस की कुमारी सैलजा ने कहा कि राज्य में हथिनी कुंड बैराज से पानी छोड़ा जा रहा है। इससे यमुना का जलस्तर बढ़ गया है और किनारों के क्षेत्रों के किसानों की फसलें बर्बाद हो गयी हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को इस पर संज्ञान लेना चाहिए और पीड़तिों की मदद करनी चाहिए। उत्तराखंड से भारतीय जनता पार्टी के अनिल बलूनी ने कहा कि राज्य के ऊपरी इलाकों में बादल फटने से भारी तबाही हो रही है। राज्य सरकार अपनी तरह से स्थिति से निपटने का प्रयास कर रही है, लेकिन उसके पास संसाधनों की कमी है। केंद्र सरकार को राज्य सरकार को संसाधन उपलब्ध कराने चाहिये।