दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के मेंबर ने सिक्किम हाउस में मुख्यमंत्री पवन चामलिंग से मुलाकात कर गुरुद्वारों पर सरकार द्वारा गैरकानूनी निर्माण की कार्रवाई पर बात की। प्रतिनिधिमंडल ने गुरुद्वारा डांगमार साहिब की मौजूदा स्थिति को बरकरार रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश का भी मुख्यमंत्री को हवाला दिया। इसके साथ ही उन्होंने सिक्किम सरकार द्वारा 1991 में धार्मिक स्थलों के बारे मेंं निकाले गये अध्यादेश को याद करवाया। 

प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को बताया कि सिक्किम प्रशासन द्वारा गुरुद्वारा डांगमार साहिब से गुरु ग्रंथ साहिब के पावन स्वरूप एवं अन्य समान को गुरुद्वारा चुंगथांग साहिब में भेजने के दौरान मर्यादा का ख्याल नहीं रखा गया। इससे सिखों की भावनाऐं आहत हुई हैं। 

दिल्ली कमेटी द्वारा गुरुद्वारा साहिबानों के अच्छे प्रबंध, स्टाफ की जरूरत एवं मरम्मत आदि के लिए हर प्रकार की सहायता सिक्किम प्रशासन को उपलब्ध कराने की पेशकश की। वहं गुरुद्वारा डांगमार साहिब की मौजूदा स्थिति को बरकरार रखने के सिक्किम प्रशासन को 1 सितम्बर 2017 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश की परवाह सिक्किम सरकार द्वारा ना करने का भी दोष लगाया। उन्होंने कहा कि जानबूझ कर चुंगथांग के एसडीएम ने 2 सितम्बर को गुरुद्वारा चुंगथांग साहिब को गैरकानूनी निर्माण संबंधी पत्र भेज के सिखों को नीचा दिखाने की कोशिश की है। 

बता दें कि प्रतिनिधिमंडल में अकाली दल के सांसद प्रेम सिंह चंदूमाजरा, बलविन्दर सिंह भूंदड, दिल्ली कमेटी अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके, महासचिव मनजिंद्र सिंह सिरसा एवं पूर्व राज्यसभा सदस्य त्रिलोचन सिंह शामिल थे।