दिल्ली में एक बार फिर आम आदमी पार्टी की सरकार बनने जा रही है। शुरुआती रुझानों में अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। हालांकि दिल्ली की एक दर्जन विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जिन पर सभी दलों की निगाहे हैं। ये सीटें किसी भी पार्टी के बहुमत में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। 

चांदनी चौक- इस सीट पर पिछली बार आप के टिकट पर जीत दर्ज करने वाली अलका लांबा ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा है। वहीं कांग्रेस के नेता रहे प्रह्लाद सिंह साहनी आप के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं।बीजेपी ने इस सीट से सुमन कुमार गुप्ता को उतारा है।

नजफगढ़- इस सीट से आप के विधायक और सरकार में मंत्री कैलाश गहलोत मैदान में हैं। इसके साथ ही बीजेपी ने यहां से अजीत खडख़ड़ी को टिकट दिया है तो कांग्रेस से साहिब सिंह यादव उम्मीदवार हैं। पिछली बार गहलोत ने यहां से सिर्फ 1500 वोट से जीत दर्ज की थी।

कृष्णानगर- साल 2015 में बीजेपी से किरण बेदी उम्मीदवार थीं। उन्हें आप के एसके बग्गा ने हराया था।हालांकि दोनों के बीच जीत-हार का अंतर 2277 वोट का ही थी। इस बार कांग्रेस के डॉक्टर अशोक वालिया और बीजेपी के अनिल गोयल मैदान में हैं।

मुस्तफाबाद- इस सीट से पिछली बार बीजेपी ने जीत हासिल की थी। दूसरे नंबर पर कांग्रेस थी। आप यहां तीसरे नंबर पर थी। इस बार आप ने हाजी यूनुस को उम्मीदवार बनाया है तो वहीं कांग्रेस ने अली मेहंदी को टिकट दिया है।

विश्वासनगर- इस सीट से पिछली बार बीजेपी के ओपी शर्मा ने 10 हजार वोट से जीत दर्ज की थी. इस बार आप ने दीपक सिंघला को उम्मीदवार बनाया है. साथ ही कांग्रेस ने नसीब सिंह की जगह गुरुचरण सिंह को टिकट दिया है. 

मॉडल टाउन- इस सीट पर आप के बागी और बीजेपी के प्रत्याशी कपिल मिश्रा चुनाव लड़ रहे हैं। आप ने साल 2015 में चुनाव जीतने वाले अखिलेश पति त्रिपाठी को उम्मीदवार बनाया है। इस बार यह सीट आप और बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न है।

गांधीनगर- इस सीट पर साल 2015 में आप के अनिल वाजपेयी ने जीत दर्ज की थी, हालांकि इस बार कांग्रेस से अरविंदर सिंह लवली के चुनाव में उतरने के साथ यह सीट काफी चर्चा में है। इस बार अनिल वाजपेयी, बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं आप से नवीन चौधरी उम्मीदवार हैं।

सीलमपुर- इस सीट पर आप ने अपना प्रत्याशी बदल दिया है। इस बार मोहम्मद इशका की जगह पार्टी ने अब्दुल रहमान को टिकट दिया है। वहीं बीजेपी ने कौशल मिश्रा और कांग्रेस ने मतीन अहमद को टिकट दिया है।

रोहिणी- यह सीट इसलिए भी जरूरी है क्योंकि साल 2015 में बीजेपी ने जो तीन सीटें जीती थीं, उनमें से यह एक है। बीजेपी के विजेंद्र गुप्ता ने इस सीट पर जीत हासिल की थी।