मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस हाईकमान के 18 सूत्रीय एजेंडे पर अमल करते हुए 2.85 लाख कृषि मजदूरों और भूमिहीन किसानों के लिए 520 करोड़ रुपए की कर्ज राहत योजना की शुरुआत की है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने कृषि मजदूरों और भूमिहीन किसानों के 520 करोड़ रुपए के कर्ज 31 जुलाई, 2017 को उनके सहकारी कर्ज पर बनती मूल राशि और 6 मार्च 2019 तक उपरोक्त रकम पर सालाना 7 प्रतिशत आम ब्याज माफ करने का फैसला किया है।  राज्य सरकार ने इससे पहले 5.85 लाख छोटे और सीमांत किसानों के 4700 करोड़ रुपए के कर्ज माफ कर दिए थे। 

उन्होंने कहा कि उनका दिल दिल्ली की सरहदों पर आंदोलन कर रहे किसानों के साथ है।  मुख्यमंत्री ने यह साफ किया कि वह केंद्र सरकार के किसानों के प्रति अपनाए जा रहे रुख से सहमत नहीं हैं।  उन्होंने केंद्र सरकार से सवाल करते हुए कहा कि हम 127 बार संविधान में संशोधन कर चुके हैं तो अब हम ऐसा क्यों नहीं कर सकते? भारत सरकार कृषि कानूनों को प्रतिष्ठा का सवाल बनाकर क्यों जिद पर उतरी हुई है? उन्होंने यह भी कहा कि उनकी तरफ से स्पष्ट रूप में प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री को यह कानून रद्द करने के लिए विनती की गई है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनको पंजाब के किसानों को दिल्ली जाने से रोकने के लिए कहा गया है। परन्तु उन्होंने यह भी बताया कि मैंने कभी भी उनको नहीं रोका क्योंकि राष्ट्रीय राजधानी में आंदोलन करने का हरेक का प्रजातांत्रिक हक है।  कैप्टन ने कहा यह छोटे किसान अपने लिए नहीं बल्कि अपनी आने वाली नस्लों के लिए लड़ रहे हैं।  उन्होने कहा कि केंद्र सरकार को किसानों का दर्द नजर नहीं आ रहा। 

उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यह किसान ज्यादातर वह हैं जिनके पास 2.5 एकड़ जमीन है।  लम्बे समय पहले अपनी पोलैंड यात्रा को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने देखा कि उस देश में जमीन की हदबंदी मौजूदा 40 एकड़ से बढ़ाकर 100 एकड़ कर दी गई थी, क्योंकि छोटी जमीनों वाले परिवार अपना गुजारा नहीं कर सकते।  मुख्यमंत्री ने कहा कि इसलिए आप यह सोच सकते हो कि उन लोगों का क्या होगा जिनके पास 2.5 एकड़ जमीन है।  वह अपने परिवारों का गुजारा कैसे चलाएंगे यदि नए कानून उन पर थोप दिए गए।