इंडिया ओपन मुक्केबाजी के 54 भारवर्ग में स्वर्ण पदक जीतने वालीं जमुना बोरो की सफलता के पीछे मां निर्मला का बड़ा हाथ है, जिन्होंने उसका बॉक्सिंग ख्वाब पूरा करने के लिए सब्जी तक बेची है।


शुक्रवार को समाप्त हुए टूर्नामेंट के दौरान जमुना की मां और भाई भी उनका मैच देखने आए थे। जैसे ही जमुना ने गोल्ड जीता, मां की आंखों से आंसूओं की बरसात शुरू हो गई जो उनकी खुशी और सपने पूरे होने का भी इजहार कर रही थी। रिंग से उतरने के बाद मां ने बेटी को गले से लगा लिया।


जमुना ने फाइनल में संध्या रानी देवी को 5-0 से पराजित किया। जमुना ने कहा कि यह पहली मर्तबा था जब मां ने रिंग में मुझे खेलते हुए देखा। मैं इसे जिंदगी भर नहीं भूलूंगी। जमुना ने अपने पिता को बचपन में खो दिया था। वह ज्यादातर साई के हास्टल में रही हैं। भारतीय मुक्केबाज ने कहा कि मैं मां के त्याग को भूल नहीं सकती।


वो खुद पूरे दिन बिना खाए रह जाती थी लेकिन मुझे कभी भूखे नहीं सोने दिया। सब्जी बेचने के लिए मां को सुबह जल्द ही घर से निकलना पड़ता था। भारतीय मुक्केबाजी फेडरेशन के प्रमुख अजय सिंह ने कहा कि असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने जमुना और उनकी मां को अलग से सम्मानित करने की भी बात कही है।