पूर्वोत्तर राज्य असम के डी वोटर मामले से जुड़ा यह मामला है दो भाईओं की जिन में छोटे भाई को विदेशी करार दे दिया गया है जब की दोनों के पास दस्तावेज़ एक जैसे ही हैं।


नगांव के रुपोही के रहनेवाले मौज़ेदार असदुल इस्लाम, और उन के छोटे भाई अमानुल इस्लाम, दोनों जहरुल इस्लाम के बेटे हैं लेकिन दुर्भाग्य यह है कि छोटे भाई अमानुल इस्लाम को वर्ष 1997 में डी वोटर बना दिया गया उस के बाद NRC में भी उन का नाम नहीं आया है। यानी वोह विदेशी नागरिक माने जा रहेहे हैं।


असदुल की माने तो वर्ष 1945 में उन के दादा मुस्लिमुद्दीन मौज़ेदार थे, उन के देहांत के बाद 1971 में असदुल के पिता जहरुल इस्लाम मौज़ेदार बने , पिता के मौत के बाद 1998 में उन की मां आसिया  खातून मौज़ेदार बनी और फिर 2017 में खुद असदुल मौज़ेदार बने। उन के पास पर्याप्य दस्तावेज़ हैं जो यह बताते हैं कि वह भारतीय नागरिक हैं।


असदुल के लिए सब से बड़ी परेशानी यह है कि आज तक उन के भाई का नागरिकता सिद्ध करने का कोइ नोटिस उन्हें नहीं मिला।  कोर्ट का दरवाज़ा भी खटखटा नहीं पा रहे हैं। क्योंकि उस के लिए एक रिफरेन्स नंबर की ज़रुरत होगी जो की नहीं है। अब उन के सामने कोई रास्ता ही नहीं बचा है जिसमें चल कर वोह अपने भाई की भारतीय होने का सबूत दे सके। ग़लती किस की है। असदुल इसलाम और उस के भाई की या फिर सरकार तंत्र में कहीं न कहीं कोई कमी है।