गुवाहाटी । राष्टीय नागरिक पंजी (एनआरसी) में सभी हिन्दीभाषियों के नाम को शामिल करने के लिए आज ग्यारह सदस्यीय एक समन्वय समिति का गठन किया गया । समिति विभिन्न स्तरों पर संपर्क कर इसके लिए पहल करेगी । समन्वय समिति  ने दो प्रतिनिधिमंडल का गठन करने का फैसला किया है, जो क्रमश: असम के भीतर और असम के बाहर जाकर अपना पक्ष रखेगा । 

मालूम हो कि एक प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय मंत्रियों, विभिन्न राज्य के मुख्यमंत्री और राजनेताओं से भेंटकर अपनी  फरियाद रखेगा, जबकि दूसरा प्रतिनिधिमंडल असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल समेत राज्य के सभी राजनीतिक पार्टियों के अध्यक्षों से भेंटकर हिन्दीभाषी के नाम शामिल करने की बात रखेगा । 

उल्लेखनीय है कि आज मंगलवार को भंगागढ़ स्थित हिंदुस्तानी केंद्रीय विद्यालय परिसर में पूर्वोतर हिन्दुस्तानी सम्मेलन के तत्वावधान में 32 हिन्दीभाषी संगठनों की एक संयुक्त बैठक हुई, जिसमें मीडिया जगत के लोग, बुद्धिजीवियों के साथ -साथ राज्य के हिंदीभाषी विधायक और सभी राजनीतिक दलों के हिंदीभाषी प्रतिनिधियों ने भाग लिया । गौरतलब है कि बैठक के दौरान सभी का मत था कि हिंदीभाषी समाज के लोग देश के नागरिक हैं, जिनका असम के विकास में किसी समाज से  कम योगदान नहीं है। 

वक्ताओं ने जिलेवार समिति का गठन कर हिंदीभाषी लोंगों को मदद देने का का सुझाव दिया तथा इस दिशा में जरूरी प्रक्रिया जल्द शुरू करने का निर्णय लिया । मालूम हो कि बड़ी संख्या में हिन्दीभाषियों के नाम एनआरसी के अंतिम मसौदे में शामिल नहीं होने पर सभी वक्ताओं ने गंभीर चिंता व्यवत की और इसके लिए केंद्र एवं राज्य सरकार का ध्यान भी आकृष्ट किया ।

 सम्मेलन के अध्यक्ष चंद्रकांत जायसवाल की अध्यक्षता में हुई बैठक का संचालन कार्यकारी अध्यक्ष विजय गुप्ता ने किया । गुप्ता ने इस पर ग्यारह सदस्यीय समन्वय समिति के सदस्यों की घोषणा करते हुए कहा कि समिति में सम्मेलन के अध्यक्ष सीके जाक्सवाल, कार्यकारी अध्यक्ष विजय गुप्ता, महासचिव एसपी राय, रमन झा, गौरव सोमानी, राजकुमार तिवाड़ी, मधुसुदन सिकडीया, सीमा गुप्ता के नाम शामिल किए गए हैं । हालाकि कुछ सदस्यों को विभिन्न जिलों से शामिल किया जाएगा । 

गुप्ता ने कहा कि हिन्दीभाषियों के नाम को एनआरसी में शामिल करने के लिए विभिन्न स्तर पर असम से लेकर दिल्ली तक कदम उठाया जा रहा है । एनआरसी स्वाभाविक रूप से देश की सुरक्षा से जुड़ा  हुआ मुद्दा है, लेकिन इसमें किसी भारतीय नागरिकों के नाम नहीं छूटे यह भी ध्यान रखना होगा । उन्होंने प्रतीक हाजेला के उस बयान का स्वागत किया, जिसमें उन्होंने सूद को महाभारत का अर्जुन कहा, लेकिन गुप्ता ने कहा कि सभी भारतीयों के नाम शामिल हो गए तो ठीक है अन्यथा भारतीयों के नाम शमिल नहीं होने पर उन्हें बड़े  समारोहपूर्वक शिखंडी की उपाधि देने के लिए हम तैयार हैं ।

 वहीं इस मौके पर सम्मेलन के महासचिव एसपी राय ने कानूनी बातों को बारीकी से समझते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय में असम सरकार भी एक पार्टी है, अगर सरकार इस समुदाय के प्रति कृत संकल्प है तो उन्हें न्यायालय में आवेदन देना चाहिए और उन्हें शामिल करने का पक्षकार बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब तक सम्मेलन की और से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, कई राज्यों  के मुख्यमंत्रियों  तथा राज्य सरकार को एक एक ज्ञापन सौपा जा चुका है । 

उन्होंने कहा कि सभी भारतीयों को मदद दी जाएगी, क्योंकि मामला काफी गंभीर है । इस मौके पर दुलियाजान के भाजपा विधायक ने कहा कि हिंदीभाषी की तरह चाय बागानों के लोंगों के नाम भी काफी काटे गए है और हम सबको मिलकर लड़ना होगा । यहां विधायक अशोक जी सिंघल ने कहा कि भारतीयता जिन लोगों से शुरू होती है, उसी भारतीय नागरिकों के नाम शामिल नहीं हुए है जो दुर्भाग्य की बात है । 

उन्होंने वहा कि भारतीय के नाम शामिल करने के लिए न्यायलय को लचीलापन रुख अपनाना चाहिए, क्योंकि यहाँ का हिंदीभाषी समाज नीलकंठ है, जो काफी विष को ग्रहण कर आज इस मुकाम पर खड़ा है । तिनसुकिया के विधायक संजय केसान ने कहा कि हिंदीभाषी से हमारी राजनीति शुरू हुई है, ऐसे में यह समाज कहीं भी मदद के लिए पुकारता है तो मैं वहां खड़ा रहता हूं । उन्होंने दावा करते हुए कहा कि तिनसुकिया में 50 प्रतिशत हिंदीभाषी का नाम नहीं आया है, जबकि 30 प्रतिशत mलोगों ने एनआरसी के लिए आवेदन ही नहीं किया ।