बजट 2020 आने में अब बस कुछ ही दिन बाकी रह गए हैं। ऐसे में हर इंडस्ट्री सरकार से अपने अपने क्षेत्र को लेकर सरकार से उम्मीद कर रही है कि सरकार उनकी क्षेत्र पर अपना पिटारा खोलेगी। रियल एस्टेट सेक्टर के डेवलपरों की संस्था क्रेडाई ने सरकार से मांग की है कि होम लोन के ब्याज पर 100 फीसदी की छूट दी जाए। ताकि लोग ज्यादा से ज्यादा घर खरीदारी की ओर अपना निवेश कर सके।


क्रेडाई का कहना है कि यदि साल 2022 तक सबको आवास उपलब्ध कराना है तो सरकार को अर्फोडेबल हाउसिंग की भी परिभाषा बदलनी चाहिए। ताकि सरकार इस सपने को साकार कर सके। रियल एस्टेट सेक्टर को अबतक एक उद्दोग का दर्जा नही मिला है। इस पर संगठन का कहना है कि रियल एस्टेट क्षेत्र को उद्योग का दर्जा देने की मांग पुरानी है, लेकिन अभी तक उसे यह दर्जा नहीं मिला है। यदि इस क्षेत्र को उद्योग का दर्जा मिल जाए तो इसे भी अन्य क्षेत्र की तरह वित्ततीय दिकक्तों का सामना नही करना पड़ेगा।

संगठन ने उम्मीद जताते हुए कहा है कि अब पूरे देश में रेरा लागू हो चुका है जिसके चलते रियल एस्टेट सेक्टर में पार्दर्शिता आई है। अब इसका फायदा ग्राहकों को मिल रहा है। इस समय रेरा ने मेट्रो शहरों में 60 वर्ग मीटर के कारपेट एरिया वाले मकानों को जबकि अन्य जगहों पर 90 वर्ग मीटर के कारपेट एरिया के मकानों को अर्फोडेबल हाउस का दर्जा दिया है। अगर सरकार इस नियम में बदलाव करती है तो इसका फायदा हर घर खरीदार को मिल सकेगा, वही डेवलपर्स को भी इसका फायदा होगा।क्रेडाई ने अपना मांग दोहराते हुए उम्मीद जताई है कि सरकार अगर होम लोन के ब्याज पर 100 फीसदी छूट कर देती है। तो इस क्षेत्र का विकास सही तरीके से हो सकेगा। मौजूदा समय में करदाता को होम लोन पर देय ब्याज पर डिडक्शन मिलता है। लेकिन यह लाभ तभी मिलता है, जब होम लोन एक अप्रैल 2016 से 31 मार्च 2017 के बीच स्वीकृत हुआ हो और यह रकम 50 हजार रुपये से अधिक नहीं हो। इसलिए सरकार इस समयसीमा को 31 मार्च 2022 तक बढ़ा दे। ताकि इसका फायदा ज्यादा से ज्यादा मिल सके।

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