त्रिपुरा में भले ही लेफ्ट का किला ढ़ह गया हो लेकिन भाजपा की आंधी में भी माणिक सरकार अपनी पारंपरिक सीट से चुनाव जीतने में कामयाब रहे। उन्होंने धानपुर सीट से लगातार पांचवी बार जीत दर्ज की। माणिक सरकार ने 1998 में पहली बार यहां से चुनाव जीता था,तब वे पहली बार राज्य के मुख्यमंत्री बने थे। माणिक सरकार की छवि ईमानदार नेता की है इसलिए सीपीएम के नेतृत्व वाले लेफ्ट फ्रंट ने इस बार भी उनके नेतृत्व में ही चुनाव लड़ा। हालांकि आठवीं बार लेफ्ट फ्रंट की सरकार बनाने का उनका सपना अधूरा रह गया।

सीपीएम पोलित ब्यूरो के सदस्य माणिक सरकार ने भाजपा की प्रतिमा भौमिक को 3,278 वोटों से हराया। भौमिक पहले भी इस सीट से दो बार चुनाव लड़ चुकी है लेकिन दोनों बार उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। प्रतिमा भौमिक 1998 और 2003 में तीसरे स्थान पर रही थी। आपको बता दें कि प्रतिमा भौमिक स्टेट बीजेपी की महासचिव हैं। इस बार कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार बदलते हुए यहां से लक्ष्मी नाग को प्रत्याशी बनाया था। 2013 के विधानसभा चुनाव में माणिक सरकार ने कांग्रेस के शाह आलम को 6,017 वोटों से हराया था। सरकार को कुल 21,286 वोट मिले थे जबकि शाह आलम को 15,269। माणिक सरकार को पहली बार 21 हजार से ज्यादा वोट मिले थेे। धानपुर सीट शुरु से वामपंथियों का गढ़ रही है।

1972 से लेकर अब तक यहां पर जितने भी चुनाव हुए हैं, हर बार सीपीएम उम्मीदवार ने ही जीत दर्ज की है। सीपीएम के ही समर चौधरी यहां से पांच बार विधायक रहे चुके हैं। 1972 के विधानसभा चुनाव में सीपीएम के समर चौधरी ने कांग्रेस के धीरेन्द्र कुमार सेनगुप्ता को सिर्फ 773 वोटों से हराया था। 1977 में सीपीएम ने फिर समीर चौधरी पर  दांव लगाया। इस बार उनका मुकाबला जेएनपी के ब्रोजेन्द्र घोष से था। चौधरी ने घोष को 3,144 वोटों से हराया। सीपीएम ने 1983 के विधानसभा चुनाव में फिर चौधरी को चुनाव मैदान में उतारा। इस बार उन्होंने कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लडऩे वाले ब्रोजेन्द्र घोष को 1,308 वोटों से हराया। 1988 में समर चौधरी का मुकाबला था कांग्रेस के प्रबीर कुमार पुल से। चौधरी ने पुल को 1,966 वोटों से हरा दिया।

1993 में समर चौधरी ने पांचवी बार यहां से चुनाव जीता। तब उन्होंने कांग्रेस के गोपाल रॉय को 4,115 वोटों से हराया। 1998 में सीपीएम ने माणिक सरकार को अपना उम्मीदवार बनाया। सरकार पहली बार यहां से चुनाव लड़ रहे थे। उनका मुकाबला था कांग्रेस के मुजिबुर इस्लाम मजूमदार से। सरकार ने मजूमदार को 3,103 वोटों से हराया। 2003 में सरकार ने फिर यहां से जीत दर्ज की। इस बार उन्होंने कांग्रेस के दीपक चक्रवर्ती को 4,502 वोटों से हराया। 2008 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने यहां से अपना उम्मीदवार बदल लिया। कांग्रेस ने शाह आलम को मैदान में उतारा। सरकार ने कांग्रेस के उम्मीदवार को 2,918 वोटों से हरा दिया।