माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने त्रिपुरा में अपनी बुरी हार के लिए चुनाव में मनी पॉवर को जिम्मेदार ठहराया है और कहा है कि भारतीय जनता पार्टी ने गैर वाम वोट को लामबंद कर चुनाव जीतने में सफलता पायी है। माकपा ने त्रिपुरा चुनाव के नतीजे आने के बाद अपनी प्रतिक्रिया में यह बात स्वीकार की है।

पार्टी पोलित ब्यूरो ने यहां जारी बयान में कहा है कि भाजपा आईपीएफटी गठबंधन वाम सरकार को 25 साल के बाद बेदखल कर सरकार बनाने जा रहा है। भाजपा ने मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए बड़े पैमाने पर धन बल का इस्तेमाल किया है और एनी संसाधनों का भी इस्तेमाल किया है। इसके अलावा हार के अन्य कारण भी रहे हैं। विज्ञप्ति में कहा गया है कि भाजपा ने वाम विरोधी मतों को अपने पक्ष में एकजुट किया और कांग्रेस के वोट बैंक को अपनी ओर खींचा है।

पार्टी ने कहा कि वाम मोर्चे को चुनाव में 45 प्रतिशत वोट मिले हैं, लेकिन वह अपनी हार के कारणों की जांच करेगी और उन्हें दूर करेगी। माकपा ने कहा कि वह त्रिपुरा की जनता के लिए अपना कार्य करती रहेगी और आदिवासी तथा गैर आदिवासी एकता को बनाये रखेगी।

गौरतलब है कि  त्रिपुरा में लेफ्ट फ्रंट को बड़ा झटका लगा है। यहां 25 साल से राज करने वाली लेफ्ट फ्रंट आज हाशिए पर आ गई है। उसे भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने करारी मात दी है। 2018 के विधानसभा चुनाव में भगवा लहर में लेफ्ट फ्रंट का सबसे मजबूत किला ढह गया है। इस चुनाव में उसे महज 16 सीटें ही मिली हैं। वहीं बीजेपी गठबंधन (यहां बीजेपी ने आईपीएफटी के साथ गठबंधन किया है) ने 43 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है। त्रिपुरा में 41 साल बाद लेफ्ट फ्रंट का इतना बुरा हाल हुआ है।