मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) (CPI(M)) ने केंद्रीय बजट 2022-23 (Union Budget 2022-23) को 'जनविरोधी' और 'कॉर्पोरेट समर्थक' करार दिया है। माकपा ने एक बयान में कहा कि 2022-23 का बजट आम लोगों के लिए राहत प्रदान करने की प्राथमिकताओं की पहचान करने में पूरी तरह से विफल रहा है। यह एक विश्वासघात है। पार्टी ने लोगों से कॉरपोरेट समर्थक बजट का विरोध करने के अपील की , वहीं आयकर दायरे से बाहर के सभी परिवारों को प्रति माह 7,500 रुपये के सीधे नकद हस्तांतरण और मुफ्त भोजन किट के वितरण की मांग की। 

माकपा ने केंद्र सरकार पर बजट में किसानों की अनदेखी करने का आरोप लगाया और कहा कि किसानों और खेतिहर मजदूरों के लिए कोई राहत की घोषणा नहीं की गयी है जो कि सफल एकजुट किसान आंदोलन का बदला लेने सरीखा लगता है। माकपा महासचिव सीताराम येचुरी (CPI(M) general secretary Sitaram Yechury) ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला (Union Finance Minister Nirmala Sitaraman) के लोकसभा में बजट पेश करने के तुरंत बाद अपनी प्रतिक्रिया में कहा, 'जनविरोधी बजट। लोगों की आजीविका पर क्रूर हमला।' 

आगे माकपा ने कहा, बजट किसके लिए? सबसे अमीर 10 फीसदी भारतीयों के पास देश की 75 फीसदी संपत्ति है। निचले वर्ग में 60 प्रतिशत के पास पांच फीसदी से कम का स्वामित्व है। महामारी के दौरान सुपर मुनाफा कमाने वालों पर अधिक कर क्यों नहीं लगाया जा रहा है।' बेरोजगारी के मुद्दे पर सरकार पर हमला करते हुए येचुरी ने कहा, 'देश में आज 20 करोड़ नौकरियां गायब हैं। शहरी रोजगार गारंटी की घोषणा नहीं की गई है। मनरेगा आवंटन वहीं का वहीं है।'