उच्चतम न्यायालय ने गोरक्षा के नाम पर होने वाली हिंसक घटनाओं की रोकथाम के लिए अलग से कानून बनाने का केंद्र सरकार को निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मंगलवार को गोरक्षा के नाम पर हिंसा की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा कोई भी नागरिक अपने हाथ में कानून नहीं ले सकता। 


न्यायालय ने स्वयंभू गोरक्षकों पर अंकुश लगाने एवं संबंधित घटनाओं की रोकथाम के लिए कुछ दिशानिर्देश भी जारी किए और इन पर अमल के लिए चार सप्ताह का वक्त दिया। न्यायालय ने अपनी सिफारिशों में कहा है कि केंद्र सरकार गोरक्षा से जुड़ी हिंसा की घटनाओं की रोकथाम के लिए अलग से कानून बनाये। पीठ ने कहा कि भीड़तंत्र पर अंकुश लगाना और कानून व्यवस्था लागू करना सरकार का काम है। 

पीठ की ओर से फैसला सुनाते हुए न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा, भय और अराजकता की स्थिति में सरकार को सकारात्मक कदम उठाना होता है। हिंसा की अनुमति किसी को भी नहीं दी जा सकती। कोई भी नागरिक कानून अपने हाथ में नहीं ले सकता। सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल पी. एस. नरसिंहा ने कहा था कि केंद्र सरकार इसे लेकर सजग और सतर्क है, लेकिन बड़ी समस्या कानून व्यवस्था की है। कानून व्यवस्था बनाए रखना राज्य सरकारों की पहली जिम्मेदारी है। केंद्र तब तक इसमें दखल नहीं दे सकता जब तक राज्य खुद इसके लिए गुहार न लगाए। शीर्ष अदालत ने तहसीन पूनावाला और महात्मा गांधी के परपौत्र तुषार गांधी की याचिकाओं की विस्तृत सुनवाई के बाद गत तीन जुलाई को फैसला सुरक्षित रख लिया था। बता दें कि गोरक्षा के नाम पर भीड़ की हिंसा के मामले में स्पष्ट गाइडलाइंस नहीं होने के कारण अभी तक पुलिस कार्रवाई में दिक्कत आ रही थी, जिससे दोषियों को बच निकलने में आसानी होती थी।

कब-कब भीड़ ने लोगों को मारा 

-1 जुलाई: महाराष्ट्र के धुले में 5 मारे, मालेगांव में 5 को पुलिस ने बचाया। 

-28 जून: त्रिपुरा में 3 की मौत, एक तो अ‌फवाह के खिलाफ कैंपेन चलाता था 

-8 जून: असम में दो टूरिस्टों की भीड़ ने ले ली जान, बाद में हिंसा भी हुई। 

-मई: आंध्र, तेलंगाना में 8 की पीटकर हत्या, कई अन्य राज्यों में भी मौतें हुईं।