आपदा में अवसर की तलाश। कोरोना महामारी में भारत से निकला यह वाक्य लगता है अब पूरी दुनिया का ध्येय बनता जा रहा है। इंडोनेशिया के एक गांव में बुजुर्ग ने इसी वाक्य की तर्ज पर कबाड़ से जुगाड़ तैयार किया है। उन्होंने घरेलू कबाड़ जैसे बर्तन, कड़ाही और अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक्स आयटम्स से एक रोबोट बनाया है। 

डेल्टा नामक यह रोबोट कोरोना प्रभावित इलाकों में लोगों को राहत पहुंच रहा है। जानकारी के अनुसार इंडोनेशिया कोरोना वायरस के डेल्टा वैरिएंट से जूझ रहा है। ऐसे में लगातार बढ़ते मामलों देखते हुए इस रोबोट को बनाने वाले असियांतों (53) ने इसका इस्तेमाल लोगों की सहायता के लिए करने का निर्णय किया।

बताया जा रहा है कि घर में तैयार यह रोबोट प्रभावित इलाकों में कीटाणुनाशक का छिडक़ाव कर सकता है। क्वॉरंटीन में रह रहे लोगों तक खाना पहुंचा सकता है। खास बात यह है कि रिमोट से संचालित रोबोट का सिर राइस कुकर से बनाया गया है। एक बार चार्ज होने पर इसकी बैट्री लगभग 12 घंटे तक चलती है। यह रोबोट उन गलियों से गुजरता है जहां लोग आइसोलेशन में रह रहे हैं। वहां पहुंच कर यह स्पीकर के जरिए उन्हें हैलो कहता है और भोजन पहुंचाने का मैसेज देता है। इतना ही नहीं, वह संक्रमितोंं के जल्द ठीक होने के लिए दुआ भी करता है।

डेल्टा रोबोट टेम्बोक गेडे गांव में बने कई रोबोट्स में से एक है। अपने आविष्कारों के लिए मशहूर यह गांव इंडोनेशिया के दूसरे सबसे बड़े शहर सुराबाया में आता है, जहां पिछले एक महीने में कोरोना की दूसरी लहर आई है। आंकड़ों के अनुसार इंडोनेशिया की कुल आबादी 27 करोड़ है। इसमें से 28 लाख लोग पॉजिटिव बताए जा रहे हैं। एक लाख से ज्यादा की कोरोना से मौत हो चुकी है।