दुनियाभर कोरोना महामारी से तबाही मची हुई है। लोग कोरोना संक्रमण के नाम से ही कांपने लगे हैं। लोग महामारी से बचने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं, लेकिन एक ऐसा लड़का भी है, जिसने जानबूझकर खुद को इस वायरस से संक्रमित कराया था। 

23 साल के छात्र जैकब हॉप्किन्स के लिए ऐसा करना उनकी जिंदगी का अब तक का सबसे बड़ा फैसला था। इसके पीछे की वजह कुछ ऐसी है, जिससे पूरी दुनिया जैकब की तारीफ करते नहीं थकेगी। दरअसल जैकब ने ऐसा एक शोध के लिए किया था, ताकि वैज्ञानिक उनकी निगरानी कर सकें और इससे उन्हें वायरस से जुड़ी जरूरी जानकारियां हासिल करने में मदद मिले। ऑस्ट्रेलिया के टैमवर्थ के रहने वाले जैकब इंग्लैंड की नॉर्थम्ब्रिया यूनिवर्सिटी के छात्र हैं। उनका कहना है कि वह ऐसा दोबारा करने को भी तैयार हैं। जैकब ने बताया कि उन्हें शोध के लिए अस्पताल के क्वारंटीन रूम में ले जाया गया था। जहां उन्हें जानबूझकर कोरोना वायरस से संक्रमित किया गया। 

इस शोध का मुख्य उद्देश्य ये पता लगाना था कि वायरस किसी को संक्रमित करने के बाद पहले दिन से किस तरह काम करता है। ताकि इसके इलाज के बारे में पता लगाया जा सके और इसे खत्म करने के लिए वैक्सीन की प्रभाविकता भी पता चल सके। इस प्रयोग के लिए जैकब ने 20 जून, 2020 में हां की थी। जैकब कहते हैं कि उन्हें ट्रायल में इसलिए शामिल किया गया, ताकि वैक्सीन का पता लगाया जा सके। लेकिन जब तक वह इसमें शामिल हुए, तब तक वैक्सीन का पता चल गया था। तो ऐसे में उनकी निगरानी कर अब वायरस के बारे में अधिक से अधिक डाटा एकत्रित किया गया।

हालांकि वह अस्पताल में क्वांरटीन होने के बाद वायरस से रिकवर हो गए थे। लेकिन क्वारंटीन का ये वक्त जैकब के लिए काफी मुश्किल भरा रहा था। इसी दौरान उन्हें अहसास हुआ कि कोरोना वायरस कितना खतरनाक है और ये कितना नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए उन्हें अपने शोध में हिस्सा लेने पर कोई पछतावा नहीं है और वह दोबारा ऐसा करने को तैयार हैं।