कोरोना वायरस के अब तक डेल्टा, लेम्डा, अल्फा के साथ कई खतरनाक वेरियंट आ चुके हैं। कोरोना वायरस के डेल्टा वैरियंट ने भारत समेत पूरी दुनिया में कोहराम मचाया हुआ है। दुनिया में सबसे पहले कोरोना वैक्सीनेशन शुरू करने वाले ब्रिटेन को भी इस वायरस ने नहीं बख्शा है। अमेरिका, फ्रांस, रूस, फिलीपींस, इंडोनेशिया, मेक्सिको, दक्षिण अफ्रीका समेत दुनिया के कई देश ऐसे हैं, जहां कोरोना के अलग-अलग वैरियंट लोगों को तेजी से संक्रमित कर रहे हैं। ऐसा नहीं है कि सिर्फ डेल्टा और लेम्डा वैरियंट ही दुनिया में कोरोना संक्रमण को फैलाने के लिए जिम्मेदार हैं।

डेल्टा वैरियंट
कोरोना वायरस का डेल्टा वैरियंट सबसे पहले भारत में पाया गया था। इसे B.1.617.2 के वैज्ञानिक नाम से भी जाना जाता है। इसे दुनियाभर में कोरोना का सबसे अधिक संक्रामक वैरियंट माना जाता है। लेकिन, इसकी इंसानी जान लेने की क्षमता को लेकर अभी तक कोई दावा नहीं किया गया है। यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार 3 जुलाई को डेल्टा वैरियंट के अमेरिका में 51.7 फीसदी मामले आए थे। पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड के अनुसार, जून के मध्य तक ब्रिटेन में कुल कोरोना संक्रमण में डेल्टा वैरियंट की हिस्सेदारी 99 फीसदी थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट है कि 100 देशों में डेल्टा संस्करण का पता चला है।

अल्फा वैरियंट
पिछले साल के अंत में दुनियाभर में कोरोना के अल्फा वैरियंट ने तहलका मचाया हुआ था। इसको वैज्ञानिक भाषा में B.1.1.7 का नाम दिया गया है। इसे सबसे पहले इंग्लैंड में खोजा गया था। यहीं से यह वैरियंट पूरी दुनिया में फैला था। अमेरिका में भी इस वैरियंट ने खासी तबाही मचाई थी। सीडीसी का अनुमान है कि रविवार तक यह वैरियंट अमेरिका में सिर्फ 28.7 फीसदी मामलों के लिए जिम्मेदार है। उस समय अल्फा वैरियंट अपने पुराने वैरियंट की तुलना में 50 फीसदी से ज्यादा संक्रामक था। इस वैरियंट में वैज्ञानिकों को 23 म्यूटेशन देखने को मिली थी।

बीटा वैरियंट
इस वैरियंट को सबसे पहले दक्षिण अफ्रीका में देखा गया था। बीटा वैरियंट का वैज्ञानिक नाम B.1.351 है। इसके दो म्यूटेशन E484K और N501Y को सबसे अधिक खतरनाक माना गया है। यह वैरियंट भी अपने पुराने वाले से 50 फीसदी ज्यादा संक्रामक था। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उन लोगों को संक्रमित कर सकता है जो कोरोन वायरस से उबर चुके हैं। इसके अलावा उन लोगों को भी जिन्हें कोविड -19 का टीका लगाया गया है।

गामा वैरियंट
कोरोना वायरस का गामा वैरियंट सबसे पहले ब्राजील में पाया गया था। गामा वैरियंट का वैज्ञानिक नाम P.1 है। सीडीसी के अनुसार, यह वैरियंट अमेरिका में 8.9 फीसदी नए संक्रमणों का कारण है। गामा वैरियंट के दो स्ट्रेन E484K और N501Y काफी खतरनाक माना गया है। जांच में पता चला है कि वैक्सीन लगवाने के बाद यह वैरियंट मामूली रूप से ही असर करता है।

एप्सिलॉन वैरियंट
कोरोना वायरस के एप्सिलॉन वैरियंट का वैज्ञानिक नाम B.1.427 है। विश्व स्वास्थ्य संगठन B.1.429 वेरिएंट को भी एप्सिलॉन वैरियंट का ही हिस्सा मानता है। इस वैरियंट को पहली बार अमेरिका के कैलिफोर्निया में देखा गया था। डब्ल्यूएचओ का कहना है कि एप्सिलॉन (बी.1.427 / बी.1.429) ज्यादा खतरनाक वैरियंट नहीं है।

योटा वैरियंट
कोरोना वायरस के इस वैरियंट को पहली बार न्यूयॉर्क में देखा गया था। इस वैरियंट को B.1.526 या Iota के नाम से जाना जाता है। सीडीसी का अनुमान है कि यह वैरियंट अमेरिका में वर्तमान में कोरोना वायरस के केवल 3 फीसदी मामलों के लिए जिम्मेदार है। अप्रैल महीने में यह वैरियंट 9 फीसदी मामलों के लिए जिम्मेदार था। इसका 484 स्ट्रेन वायरस को संक्रमित कोशिकाओं से अधिक आसानी से जुड़ने में मदद करता है।
ईटा वैरियंट
इस वैरियंट को पहली बार ब्रिटेन और नाइजीरिया में देखा गया था। ईटा वैरियंट को B.1.525 के नाम से भी जाना जाता है। इसके स्ट्रेन का नाम E484K है। अमेरिका में इस वैरियंट से संक्रमित होने वाले लोगों की तादाद काफी कम है। अब लगभग किसी भी संक्रमित व्यक्ति में कोरोना का यह स्ट्रेन नहीं मिल रहा है।

जीटा वैरियंट
जीटा वैरियंट भी पहली बार ब्राजील में पाया गया था। इसे P.2 के नाम से भी जाना जाता है। इस वैरियंट ने ब्राजील में बहुत तबाही मचाई थी। इसका E484K स्ट्रेन काफी घातक माना जाता है। हालांकि, विश्व स्तर पर यह स्ट्रेन अब नहीं मिल रहा है।