दुनियाभर में कोरोना की वैक्सीन बनाने का काम तेजी से चल रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, फिलहाल 33 कंपनियों के कोरोना वैक्सीन का परीक्षण चल रहा है, जिसमें से 9 वैक्सीन क्लीनिकल ट्रायल के तीसरे चरण में हैं। इनमें ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन, मॉडर्ना की वैक्सीन और बायोएनटेक-फाइजर की वैक्सीन आदि प्रमुख हैं। 

बता दें कि बायोएनटेक और फाइजर की वैक्सीन रेस में सबसे आगे हो गई है। माना जा रहा है कि ये दोनों कंपनियां अक्तूबर तक वैक्सीन के प्रभावों का आकलन कर लेंगी और उसके बाद अगर इसके आपात इस्तेमाल की मंजूरी मिल जाती है, तो नवंबर तक वैक्सीन बाजार में उतारी जा सकती है। हालांकि हाल ही में बायोएनटेक कंपनी के सीईओ और को-फाउंडर उगुर साहिन ने तो एक निजी न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा था कि उनकी वैक्सीन अक्तूबर के आखिर तक उपलब्ध हो सकती है। 

अमेरिकी कंपनी मॉडर्ना की वैक्सीन का इस वक्त तीसरे चरण का ट्रायल चल रहा है। इसे भी वैक्सीन की रेस में आगे माना जा रहा है। माना जा रहा है कि कंपनी दिसंबर में वैक्सीन के प्रभावों का पता लगा लेगी। दिसंबर अंत तक या अगले साल की शुरुआत में इसके बाजार में आने की उम्मीद है। उधर, ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन के ट्रायल के दौरान एक व्यक्ति बीमार पड़ गया था, जिसके बाद ट्रायल को रोक दिया गया था। हालांकि बाद में पता चला कि वह वैक्सीन की वजह से बीमार नहीं पड़ा था, जिसके बाद दोबारा वैक्सीन का ट्रायल शुरू हुआ। अब माना जा रहा है कि इस देरी की वजह से यह वैक्सीन अब अगले साल ही बाजार में आ पाएगी। 

चीन की सिनोवैक बायोटेक फार्मा कंपनी ने इस साल के अंत तक वैक्सीन बाजार में उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा चीन की ही कैन्सिनो बायोलॉजिक्स इंक की वैक्सीन Ad5-nCoV भी इस साल के अंत तक बाजार में आ सकती है। इस वैक्सीन को बीजिंग इंस्टीट्यूट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी के सहयोग से बनाया गया है। हालांकि फिलहाल दोनों ही वैक्सीन के तीसरे चरण का ट्रायल चल रहा है।