भारत में कोरोना वायरस वैक्सीन के Side Effects को लेकर तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं। असामाजिक तत्वों ने कई तरह के अफवाहों को भी हवा दी है। वैक्सीन को लेकर यहां तक संदेह पैदा कर दिए गए कि इसे लेने वालों की मौत भी हो रही है। हालांकि, सरकार, स्वास्थ्य वैज्ञानिकों के साथ-साथ चिकित्सा जगत के लोग वक्त-वक्त पर स्थित स्पष्ट करते रहते हैं।

सरकार ने हाल ही में कोरोना वैक्सीन के गंभीर दुष्प्रभावों की समीक्षा की है। इससे पता चला कि 5 फरवरी से 31 मार्च के बीच कोविड-19 महामारी से बचाव के लिए वैक्सीन लेने वाले लाखों लोगों में से सिर्फ 31 में एनाफिलैक्सिस (Anaphylaxis) बना और उनमें एक की मृत्यु हो गई। यानी, स्पष्ट है कि कोरोना वैक्सीन से मौतों की बात सरासर गलती है। हां, इस एक मौत को कोरोना वैक्सीन के साइड इफेक्ट से जरूर जोड़ा जा सकता है।

5 फरवी से 31 मार्च के बीच भारत में 60 लाख लोगों को कोरोना की वैक्सीन लगाई गई थी। इस दौरान वैक्सीन लेने वालों में 28 लोगों की मौत हुई, लेकिन ज्यादातर मौतों का कारण वैक्सीन नहीं था जबकि नौ मौतों के पीछे वैक्सीन की भूमिका थी कि नहीं, यह पता नहीं किया जा सका।

टीकाकरण के दुष्प्रभावों (AEFI) की निगरानी के लिए बनी राष्ट्रीय समिति के अध्यक्ष डॉ. एनके अरोड़ा ने कहा, "यह पहली डेथ है जिसमें वैक्सीन के कारण एनाफिलैक्सिस रिएक्शन होने की पुष्टि हुई है। करोड़ों लोग वैक्सीन ले चुके हैं और लेकिन बहुत कम लोगों पर गंभीर दुष्प्रभाव हुए। सिर्फ 31 लोगों में ही एनाफिलैक्सिस केस का पता चला और सिर्फ एक मौत की पुष्टि हो पाई है। ज्यादातर एनाफिलैक्सिस रिएक्शन वाले मरीजों का इलाज हो गया।"

एनाफिलैक्सिस एक तरह की एलर्जी है जिसके गंभीर, जानलेवा परिणाम हो सकते हैं। इससे जिस शख्स की मौत हुई थी, वो 68 वर्ष के बुजुर्ग थे। उन्होंने 8 मार्च, 2021 को वैक्सीन लगवाई थी। अंग्रेजी अखबार द हिंदुस्तान टाइम्स (HT) का दावा है कि उसने संबंधित रिपोर्ट देखी है। वहीं, वैक्सीन प्रॉडक्ट से संबंधित जिन दो अन्य लोगों में पाए गए रिएक्शन (एनाफिलैक्सिस) उनमें से एक 21 वर्ष की महिला जबकि दूसरा 22 वर्ष का पुरुष है। उन्होंने क्रमशः 19 जनवरी और 16 जनवरी को वैक्सीन डोज ली थी। दोनों अस्पताल में इलाज के बाद ठीक हो गए।