तबलीगी जमात के लोगों द्वारा कोरोना से दोस्ती और भारतीय सामाजिक सौहार्द को किया तार-तार करने की बात सामने आई है। जी हां, एक तरफ जहां मोदी सरकार को एक तरफ कोरोना वायरस की महामारी से लड़ना पड़ रहा है, तो दूसरी तरफ तबलीगी जमात की वजह से सांप्रदायिक ध्रुवीकरण से भी लड़ना पड़ रहा है। इस तरह मोदी सरकार को इस समय दो मोर्चों पर जंग लड़नी पड़ रही है। देश में कोरोना वायरस के मामले बढ़ने में तबलीगी जमात की एक बड़ी भूमिका नजर आई है, जिससे सामाजिक सौहार्द पर खतरा मंडराने लगा है।

सरकार के कुछ वरिष्ठ सूत्रों की मानें तो देशभर से मिल रहे फीडबैक से पता चल रहा है कि तेजी से कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों और तबलीगी जमात के लोगों द्वारा डॉक्टरों-नर्सों के साथ अभद्र व्यवहार ने सामाजिक सौहार्द को कमजोर किया है। ये सब उस समय हो रहा है जब सरकार को कोरोना जैसी बड़ी महामारी से लड़ना पड़ रहा है। इसी वजह से पीएम मोदी ने मुख्यमंत्रियों से कहा है कि वह धर्म गुरुओं से समर्थन करने को कहें। उन्हें कहें कि उनकी आस्था तभी बचेगी, जब वह एक साथ मिलकर कोरोना वायरस से लड़ेंगे।
सूत्रों के अनुसार तबलीगी जमात के नेताओं द्वारा निजामुद्दीन मकरज में सोशल डिस्टेंसिंग ना दिखाने के बाद अब जिस तरह जमाती लोग डॉक्टरों और नर्सों के साथ तमाम अस्पतालों में बुरा बर्ताव कर रहे हैं, उससे एक बड़ी आबादी के अंदर गुस्सा भर गया है।
देशभर के सैकड़ों हिस्सों से मिली प्रतिक्रिया में साफ हो रहा है कि भीड़ द्वारा डॉक्टरों से मारपीट करने की तस्वीरें किस तरह से नुकसान बढ़ा रही है। इतना ही नहीं, इससे यह झूठा विश्वास भी फैलता दिख रहा है कि धर्म में आस्था बनाए रखना आपके प्रतिरक्षा तंत्र को लोहे जैसा मजबूत कर देगा। बता दें कि पिछले दिनों में कभी कोरोना वायरस का टेस्ट करने गए डॉक्टरों के साथ मारपीट की गई, कभी उन पर थूका गया तो कभी पुलिस के साथ भी अभद्रता दिखाई गई।
हाल ही में टेलिकॉम विभाग ने लोकप्रिय वीडियो शेयरिंग प्लेटफॉर्म टिक-टॉक से कहा है कि वह आपत्तिजनक वीडियोज़ को अपने प्लेटफॉर्म से हटाए और भड़काऊ कंटेंट को रोकने के लिए कोई एल्गोरिद्म बनाए। सूत्रों के अनुसार दोनों के बीच की ये बातचीत बहुत अच्छी नहीं थी, क्योंकि टेलिकॉम विभाग के लोगों ने टिक-टॉक से सख्ती से बात करते हुए अपनी ताकत याद दिलाई।
सरकार वाट्सऐप और फेसबुक के प्रतिनिधियों के साथ भी टच में है, ताकि भड़काऊ कंटेंट कहीं पर भी ना फैले, लेकिन उसे ऐसा लग रहा है कि वह बेहद मुश्किल काम कर रही है। सरकार के एक वरिष्ठ सूत्रों के अनुसर इस समय समर्थन न करने वाली चीजों की निंदा करने का है और हर कम्युनिटी को साथ मिलकर वायरस से लड़ने की जरूरत है।
सूरकारी सूत्रों ने ये उम्मीद भी जताई है कि पीएम मोदी का 'दीया जलाओ' कैंपेन लोगों का ध्यान तबलीगी जमात से खींचकर दूर ले जा सकता है, लेकिन इस दिशा में और भी अधिक काम करने की जरूर है ताकि सरकार के सामने कानून-व्यवस्था को लेकर चुनौती ना खड़ी हो।

हाल ही में कोरोना वायरस से लड़ने के लिए राज्यों के मुख्यमंत्रियों की जो बैठक हुई थी, उसमें सांप्रदायिक तनाव पर पूरी तरह से ध्यान नहीं दिया गया। इस बातचीत के बीच में ही एक डॉक्टर ने सबको ये कहते हुए चौंका दिया था कि डॉक्टर्स तबलीगी जमात के लोगों के पास जाने के राजी नहीं हो रहे हैं, जो कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं।
डॉक्टरों के अनुसार सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि इस्लाम का प्रचार-प्रसार करने वाले ये मानने को तैयार ही नहीं हैं कि उन्होंने कुछ गलत किया है। वह इसके लिए भी तैयार नहीं हैं कि इस महामारी से लड़ने के लिए नियमों का पालन करना जरूरी है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में उपस्थित सभी लोगों ने डॉक्टरों की बात का समर्थन किया।