दक्षिण अफ्रीका में मिले कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वैरिएंट (Omicron Variant) को लेकर नई डराने वाली खबर सामने आई है। दक्षिणी अफ्रीकी डॉक्टर का कहना है कि इस बार 5 साल से कम उम्र के बच्चों में भी संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। हालांकि, सभी बच्चे ओमिक्रॉन से संक्रमित नहीं हैं, फिर भी बच्चों में संक्रमण बढ़ने से चिंता जरूर बढ़ गई है।

ओमिक्रॉन वैरिएंट जिस तेजी से फैल रहा है इसका अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि शुक्रवार को दक्षिण अफ्रीका में 16,055 नए मामले सामने आए हैं और 25 मरीजों की मौत हुई है। जबकि, नवंबर के दूसरे हफ्ते में हर दिन महज 200 मामले ही सामने आ रहे थे। हालांकि, बढ़ते संक्रमण के बीच वैज्ञानिकों ने छोटे बच्चों को लेकर चिंता जताई है।

दक्षिण अफ्रीका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कम्युनिकेबल डिसीजेस (NICD) की डॉ. वासिला जसैट (Dr Waasila Jassat) ने कहा कि किसी भी वायरस में बच्चों के संक्रमित होने का खतरा कम रहता है। पहले की महामारियों में भी यही देखने को मिला है। लेकिन तीसरी लहर में 5 साल से छोटे बच्चों और 15 से 19 साल के युवाओं के अस्पताल में भर्ती होने की संख्या बढ़ी थी और अब चौथी लहर में हमने सभी एज ग्रुप में संक्रमण की बढ़ने का ट्रेंड देखा है, खास तौर से 5 साल से छोटे बच्चों में।

उन्होंने कहा, 'उम्मीद के मुताबिक बच्चों में संक्रमण अब भी कम है। लेकिन 5 साल से छोटे बच्चों में ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है। 60 साल से ऊपर के बुजुर्ग इस वायरस से सबसे ज्यादा संक्रमित हैं और दूसरे नंबर पर 5 साल से छोटे बच्चों की संख्या है। उन्होंने ये भी कहा कि इस बार हमें कुछ अलग ट्रेंड भी देखने को मिल रहा है।

NICD से जुड़ीं डॉ. मिशेल ग्रोम (Dr Michelle Groome) ने भी यही चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों में संक्रमण तेजी से क्यों फैल रहा है, इस पर रिसर्च होगी। इस बारे में अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी, हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि सरकारों को बच्चों के लिए बेड और स्टाफ बढ़ाने की ओर ध्यान देने की जरूरत है।

गौतेंग प्रांत में दक्षिण अफ्रीका के 80 फीसदी से ज्यादा नए मामले सामने आ रहे हैं। यहां के हेल्थ डिपार्टमेंट से जुड़ीं डॉ. साकीसी मालुलेके (Dr Ntsakisi Maluleke) ने भी चिंता जताई है। उन्होंने बताया कि इस बार संक्रमण युवाओं के अलावा गर्भवती महिलाओं में भी तेजी से फैल रहा है। उम्मीद है कि आने वाले कुछ हफ्तों में हम इसका कारण तलाश लेंगे कि संक्रमण इस एज ग्रुप में तेजी से क्यों फैल रहा है।

कोरोना संक्रमण के नए वैरिएंट B.1.1.529 की पहचान 24 नवंबर को हुई थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे 'वैरिएंट ऑफ कंसर्न' यानी चिंताजनक घोषित किया है। अब तक ये वैरिएंट भारत समेत दुनिया के करीब 38 देशों में मिल चुका है। अब तक जो जानकारी सामने आई है, उसमें ये पता चला है कि इस वैरिएंट से 40 साल से कम उम्र के लोगों को संक्रमण का खतरा ज्यादा है। इसके साथ ही जिन्हें वैक्सीन नहीं लगी है, उन्हें भी ज्यादा खतरा है।