भारत में Coronavirus Double Mutant खतरनाक हो चुका है जिसे चलते सरकार ने बड़ी बात कही है। भारत में कोरोना की दूसरी लहर के लिए UK वेरिएंट और कुछ हद तक डबल म्यूटेंट को जिम्मेदार माना जा रहा था। UK वेरिएंट को ज्यादा संक्रामक कहा जा रहा था लेकिन अब सरकार ने कहा है कि भारत में कोरोना की दूसरी लहर में मच रही तबाही के पीछे डबल म्यूटेंट ही जिम्मेदार हो सकता है।

सरकार का कहना है कि UK वेरिएंट को बहुत ज्यादा संक्रामक और कोरोना के गंभीर लक्षण पैदा करने के लिए जाना जाता है लेकिन अब पूरे देश में इस वेरिएंट के मामलों में गिरावट देखी जा रही है।

UK वेरिएंट से संक्रमित होने वालों की संख्या में कमी है लेकिन भारत के लोकल डबल म्यूटेंट वेरिएंट B.1.617 से संक्रमित होने वालों की संख्या में तेजी से उछाल आ रहा है। सबसे पहले ये वेरिएंट महाराष्ट्र में पाया गया था।

नेशनल सेंटर फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल के डायरेक्टर सुजीत सिंह का कहना है कि पिछले एक-डेढ़ महीने में तेजी से बढ़े मामलों के पीछे डबल म्यूटेंट वेरिएंट जिम्मेदार हो सकता है। कुछ दिनों पहले WHO ने बताया था कि डबल म्यूटेंट वेरिएंट सबसे पहले भारत में पाया गया था जो अब कम से कम 17 देशों में फैल चुका है।

सिंह ने कहा, ' UK वेरिएंट B117, SARS-CoV2 से संबंधित है और इसकी वजह से दूसरी लहर में महाराष्ट्र और दिल्ली में मामले तेजी से बढ़े थे। हालांकि अब इस वेरिएंट के मामले कम आ रहे हैं। महाराष्ट्र और कई दूसरे राज्यों में अब B.1.617 के मामले ज्यादा आ रहे हैं।'

सिंह ने कहा, 'कुछ राज्यों में पिछले डेढ़ महीने से लगातार बढ़ रहे कोरोना संक्रमण के मामले और B.1.617 की बढ़ती मौजूदगी के बीच संबंध देखा गया है।' हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि महामारी विज्ञान और क्लिनिकल रूप से अभी B.1.617 और कोविड के बढ़ते मामलों के बीच संबंध पूरी तरह स्थापित नहीं हो पाया है।

भारत में यूके, ब्राजील और साउथ अफ्रीका के वेरिएंट पाए गए हैं और सरकार ने इन्हें 'वेरिएंट ऑफ कंसर्न' की श्रेणी में डाला है यानी ये वेरिएंट चिंता का विषय हैं। भारत में 13,000 सैंपल की जांच की गई जिसमें से 3532 मामले वेरिएंट ऑफ कंसर्न के हैं। जबकि 1527 मामले लोकल वेरिएंट B.1.617 के मिले। ये वेरिएंट ज्यादातर महाराष्ट्र, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, गुजरात, छत्तीसगढ़, झारखंड और मध्य प्रदेश से इकठ्ठा किए गए सैंपलों में पाए गए हैं।

एक्सपर्ट के मुताबिक, B.1.617 वेरिएंट के दोनों म्यूटेशन E484Q और L425R वायरस के स्पाइक प्रोटीन हिस्से में स्थित हैं। स्पाइक प्रोटीन कोरोना वायरस का बाहरी हिस्सा है जिसके जरिए वायरस मानव शरीर की कोशिकाओं में दाखिल होता है। ये दोनों स्पाइक म्यूटेशन इम्यूनिटी को भी चकमा देने में सक्षम हैं इसलिए इनकी संक्रामक क्षमता भी ज्यादा बताई जा रही है।

बायोटेक्नोलॉजी विभाग की सचिव रेणु स्वरूप ने कहा कि भारत में अप्रैल 2020 में जीनोम सर्विलांस और सिक्वेंसिंग की शुरुआत हुई थी। चिंता करने वाली बात तभी होती है जब पर्याप्त डेटा में सर्विलांस और महामारी विज्ञान से संबंधित साक्ष्य मिलें। उन्होंने कहा कि फरवरी और मार्च में राज्य नियमित रूप से वेरिएंट से संबंधित रिपोर्ट भेजते थे, जिनकी स्टडी की जाती थी।

स्वरूप ने कहा कि इस बात के अभी पर्याप्त डेटा नहीं मिले हैं कि ये वेरिएंट ज्यादा खतरनाक है या फिर ये वायरस का बस रूटीन म्यूटेशन है। आपको बता दें कि आंध्र प्रदेश में अब कोरोना का एक और वेरिएंयट N440K पाया गया है जो 15 गुना ज्यादा संक्रामक बताया जा रहा है।