केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने स्वदेश निर्मित कोरोना वायरस कोविड-19 की संभावित वैक्सीन ‘कोवैक्सीन’ के लिए मानव परीक्षण शुरू होने पर कहा है कि मई से वैक्सीन के विकास के लिए जारी प्रयास के सकारात्मक संकेत मिलने लगे हैं। 

डॉ हर्षवर्धन ने ‘कोवैक्सीन’ बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक की घोषणा का स्वागत किया, जिसमें उसने बताया कि 15 जुलाई से वैक्सीन का मानव परीक्षण शुरू हो गया है। कंपनी अभी पहले चरण का मानव परीक्षण कर रही है। यह परीक्षण देश के 375 लोगों पर किया जा रहा है, जो अपनी मर्जी से इसमें शामिल हुए हैं। यह परीक्षण दो चरणों में होगा। पहले चरण का मानव परीक्षण 14 शोध संस्थानों में किया जा रहा है और शोध के हर आंकड़ेे पर भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान संस्थान (आईसीएमआर) के वैज्ञानिक नजर बनाये हुए हैं। 

स्वास्थ्य मंत्री ने इस खबर से उत्साहित होकर कहा, हम जल्द ही इस महामारी पर पूरी तरह जीत प्राप्त कर लेंगे। कोविड-19 के खिलाफ जंग अब निर्णायक दौर में है। स्वदेशी कोरोना वैक्सीन का मानव परीक्षण शुरू हो गया है। इसी बीच हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने ट्वीट करके यह जानकारी दी है कि भारत बायोटेक ने रोहतक के पीजीआई में कोवैक्सीन का मानव परीक्षण 17 जुलाई को शुरू किया। इसके लिए तीन लोगों को यह वैक्सीन दी गयी और उन पर कोई दुष्प्रभाव नहीं दिख रहा है।

वहीं साइंटिस्‍ट क्‍लॉस स्‍टॉ ने दुनियाभर की सरकारों से अपील की है कि वे कई सालों के लिए तैयारी करें। 2003 में SARS देने वाले कोरोना वायरस का पता लगाने में अहम भूमिका अदा करने वाले क्‍लॉस ने कहा कि यह महामारी एविएशन फ्लू जितनी खतरनाक साबित हो सकती है। उनके मुताबिक, कोरोना की सेकेंड वेव जरूर आएगी और वो बेहद गंभीर होगी। क्‍लॉस ने ब्‍लूमबर्ग से बातचीत में कहा कि 'दुनिया की 90 फीसदी से ज्‍यादा आबादी खतरे में है। अगर हम सीरियस लॉकडाउन या ऐसे ही कदम नहीं उठाते तो यह वायरस बहुत बड़ी महामारी बन जाएगा। वैक्‍सीन को लेकर उन्‍होंने कहा कि दुनिया दो समूहों में बंट जाएगी। एक जिसके बाद वैक्‍सीन होगी और दूसरा जिसके पास वैक्‍सीन नहीं होगी। उन्‍होंने कहा कि थर्ड वेव तक दुनिया की 80त्न आबादी में ऐंटीबॉडीज हो जाएंगी।