कोरोना वायरस को लेकर चौंकाने वाली रिपोर्ट समाने आई है कि यह व्यक्ति के मरने के बाद भी उसके शरीर में जिंदा रहता है। कोरोना वायरस मरने के बाद भी किसी व्यक्ति के शरीर में तब तक ही जिंदा रह सकता है, जब तक कि व्यक्ति के शरीर में फ्लूड यानी तरल रहता है। किसी व्यक्ति की मौत के बाद अगर उसे दफना दिया जाए तो उसके शरीर का तरल खत्म होने में करीब 3-4 दिन लग जाते हैं। यानी इन 3-4 दिनों तक वायरस शरीर में रहता है। इस दौरान अगर किसी ने दफनाए हुए शख्स को निकाला और वायरस कैसे भी मुंह, आंख, नाक या खून के जरिए शरीर में घुसा तो उसका संक्रमित होना तय है।

विज्ञान की बात करें तो दोनों ही तरीके सुरक्षित हैं। यहां तक कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी कहा है इबोला के दौरान एक एडवाइजरी जारी की थी और कहा था कि मरने वाले संक्रमित व्यक्ति को दफना सकते हैं, लेकिन कुछ बचाव के उपाय करने होंगे। यानी दफनाने की प्रक्रिया के दौरान इसके फैलने का खतरा होता है, जो जलाने की प्रक्रिया में भी हो सकता है। हालांकि, जलाने के बाद राख से कोई इंफेक्शन का खतरा नहीं रहता, जबकि दफनाने के बाद 3-4 दिनों तक शव में कोरोना वायरस जिंदा रहता है, क्योंकि उसमें तरल 3-4 दिन तक रहता है।
दिल्ली एम्स के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया के मुताबिक कोरोना वायरस शवों से नहीं फैल सकता। उनका कहना है कि ये रेस्पिरेटरी सिस्टम के लिक्विड- कफ, लार वगैर से फैलता है। ये वायरस खांसी या छींक से फैलता है, इसलिए शवों के अंतिम संस्कार से कोई खतरा नहीं है। उन्होंने कहा कि ये वायरस जलाने पर हवा में नहीं फैलता।
चीन में कोरोना संक्रमित मरीजों को दफनाने के बजाय जलाने के आदेश दिए जा चुके हैं। वहां तो सख्ती इतनी अधिक है कि अगर परिवार वाले ना भी मानते हैं तो अस्पताल को ही अधिकार है कि वह मृत के शरीर को जला दे। दरअसल वहां संक्रमण इतनी तेज फैल रहा था कि दफनाने की प्रक्रिया व्यावहारिक रूप से मुमकिन नहीं थी।
शुरुआत में मुंबई में कोरोना संक्रमित शवों को दफनाने के बजाय जलाने की बात कही थी। इसे लेकर आदेश भी जारी हुआ, लेकिन बाद में उसे वापस लेना पड़ा क्योंकि विरोध होने लगा था।

हालांकि बेशक शव को जलाना अधिक सुरक्षित है, लेकिन दफनाने में भी कोई खतरा नहीं है, लेकिन गाइडलाइन्स का पालन हो। जैसे शव को छूना, गले लगाना, उसे चूमना नहीं है। उसे नहला-धुलाकर नए कपड़े नहीं पहनाने हैं, जैसा कि भारत में होता है। शव को एक सील पैक बैग में ही रखना है। अंतिम संस्कार की जह बहुत सारे लोग जमा नहीं होने चाहिए। साथ ही गहरे गड्ढे में दफनाना जरूरी है।