कोरोना कई तरह के रूप बदल कर इंसानों पर अटैक कर रहा है। अब तक कई कोरोना के  5 रूप बताए जा रहे हैं। जिससे इलाज कर पाना मुश्किल हो रहा है। वैसे भी कोरोना की वैक्सीन अभी तक नहीं बन पाई है। जिससे लोगों की मौत हो रही है। अब तक कोरोना से 5 करोड़ से ज्यादा मौतें हो चुकी है और इसका सिलसिला अभी भी जारी है।  स्वास्थ्य विभाग द्वारा बताया जा रहा है कि कोरोना वैक्सीन अगले साल 2021 में आ जाएगी। साथ लोगों को कोरोना वैक्सीन मुफ्त में दी जाएगी।


इसी कड़ी में MGM मेडिकल कॉलेज के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग प्रमुख डॉ. सलिल भार्गव ने बताया कि ज्यादातर लोगों की मौत एक्यूट ऑक्सीजन रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (ARDS) से हुई है। डॉक्टर का कहना है कि साइटोकॉइन स्टॉर्म बीमारी के पांचवें या सातवें दिन आने वाला तूफान है। इसमें वायरस नाक और मुंह से होते हुए फेफड़ों पर तापड़तोड़ अटैक करते हैं। जिस कारण वहां की एलोलाई कड़क हो रही है। फेफड़ों में जालीनुमा रचना होती है, जो ऑक्सीजन सोखती है और छोड़ती है, लेकिन एलोलाई कड़क होने पर यह पूरी तरह ब्लॉक हो जाती है जिससे शरीर में ऑक्सीजन का फ्लो खत्म हो जाता है।


सबसे पहले तो कोरोना वायरस फेफड़ों में ऑक्सीजन ब्लॉक करता है। जिससे फेफड़े फट जाते हैं। जिससे मरीज की मौत हो जाती है। अगर फेफड़े नहीं फटते है तो सांस ना आने की वजह से मरीज की मौत हो जाती है। इसी तरह से निमोनिया के बाद मरीज की ARDS से मौत हो रही है। इसमें कोरोना के अटैक के कारण फेफड़ों में एक फ्लूइड जमा हो जाता है। इससे एयर पाइप ब्लॉक हो जाते हैं। इससे भी मरीज को सांस लेने में तकलीफ होती है और सांस ना आने के कारण अंत में मौत हो जाती है।