कोरोनावायरस के खतरों के बीच जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने कार्यालय की कुछ पारंपरिक प्रथाओं को बदलने की अपील की है। इनमें हाथ से दस्तावेजों पर मुहर लगाना भी शामिल हैं, जो वायरस की रोकथाम में बड़ी बाधा है। इसकी वजह से लोगों को सील दिखाने के लिए ट्रेनों में भीड़ के बीच सफर करना पड़ता है। आबे इस प्रथा को बंद कर सोशल डिस्टेंसिंग के जरिए 70 फीसदी तक लोगों को एक-दूसरे से मिलने पर रोकना चाहते हैं।

अभी आबे सरकार के आदेश ही सोशल डिस्टेंसिंग में बाधा बने हुए हैं। मौजूदा संकट को रोकने के लिए छोटे व्यवसायियों और अन्य वर्ग के लोगों को सब्सिडी के लिए आवेदन रोजगार कार्यालय में व्यक्तिगत पेश करने के लिए कहा गया है, जिससे संक्रमण का खतरा अधिक है। जापान में दस्तावेजों पर मुहर या ‘हैंको’ का प्रयोग सदियों से हो रहा है। ये लाल स्याही में लगाई जाने वाली मुहर है।

जापान में घर से काम करने को लेकर भी लोग कम इच्छुक हैं। टोक्यो चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने पिछले माह फैक्स के जरिए किए एक सर्वे में पाया कि 1333 कंपनियों में महज 26 फीसदी ही घर से काम करवाने की इच्छुक हैं। जापान में अब सील के प्रयोग पर लोगों की कड़ी प्रतिक्रिया सामने आने लगी है। व्यापार लॉबी कीडरेन के प्रमुख हिरोकी नाकिनेसी ने कहा, सब कुछ इलेक्ट्रिॉनिक हस्ताक्षर से संभव है। आधुनिक दौर में पहचान और प्रमाणीकरण के लिए जहां अत्याधुनिक तकनीक सामने है, मुहर की उपयोगिता समझ से बाहर है।