भारत में कोविड-19 के मामलों की संख्या अचानक बढ़ने की रिपोर्ट पर डॉक्टरों ने कहा कि कोविड के मामले बढ़ने के लिए ओमिक्रॉन के सब-वेरिएंट जिम्मेदार हैं। मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, हालांकि डॉक्टर उन्हें हल्का बता रहे हैं, यह देखते हुए कि संक्रमित लोगों में लक्षण 2-3 दिनों के भीतर हल हो जाते हैं और अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं पड़ती।

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ग्लोबल हॉस्पिटल, मुंबई में सीनियर कंसल्टेंट-इंटरनल मेडिसिन मंजूषा अग्रवाल ने कहा, मैंने देखा है कि हाल ही में कोविड पॉजिटिव मरीज 48 से 72 घंटों में बेहतर हो रहे हैं। किसी को भी रेमडेसिविर या इम्यूनोथेरेपी की जरूरत नहीं है। मरीजों को कोई बड़ी जटिल समस्या नहीं होती। उन्होंने कहा कि टीकाकरण के कारण संक्रमितों को गंभीर परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता। मंजूषा ने कहा, यह जनवरी की तुलना में हल्की लहर है। या हम कह सकते हैं कि यह कोविड की सबसे हल्की लहर है।

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फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट के आंतरिक चिकित्सा निदेशक सतीश कौल ने बताया कि वह नियमित रूप से ओपीडी में कोविड के लक्षणों वाले रोगियों को देख रहे हैं। कौल ने बताया, संक्रमित रोगियों में बुखार, गले में खराश या शरीर में दर्द, थकान और खांसी के बाद गले में जलन के लक्षण शुरू होते हैं।उन्होंने कहा कि ये लक्षण ओमिक्रॉन के रोगियों में देखे गए लक्षणों के जैसे ही हैं। उन्होंने कहा, सब-वेरिएंट इम्यूनिटी से बचने की कोशिश करता दिख रहा है, जिसका मतलब है कि यह वैक्सीन से बढ़ने वाली इम्यूनिटी और पिछले कोविड-19 संक्रमण से प्राप्त इम्यूनिटी के कारण ज्यादा दिन टिक नहीं पाता।