केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बच्चों के टीकाकरण के लिये अलग योजना बनाने पर जोर देते हुए मंगलवार को कहा कि इसके लिए अलग टीम और केंद्र बनायें जाने चाहिए। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में सचिव राजेश भूषण (Rajesh Bhushan) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सचिवों के साथ एक ऑनलाइन समीक्षा बैठक में कहा कि टीकाकरण (corona vaccination) में किसी तरह की भ्रम की स्थिति नहीं रहनी चाहिए। देश में 15 से 18 साल के आयु वर्ग की जनसंख्या सात करोड़ 40 लाख 57 हजार तथा गंभीर बीमारियों से ग्रस्त वरिष्ठ नागरिकों की संख्या दो करोड़ 75 लाख 14 हजार है। 

उन्होंने कहा कि 15 से 18 वर्ष की आयु का टीकाकरण (corona vaccination) तीन जनवरी से प्रारंभ होगा और इसका पंजीकरण एक जनवरी से कोविन एप पर हो सकेगा। टीका करण केंद्र (vaccination center) पर भी पंजीकरण कराया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि इस आयु वर्ग के लिए अलग समर्पित कोविड टीकाकरण केंद्र स्थापित किया जाना चाहिए। इनके लिए अलग टीकाकरण टीम और अलग कतारें होगीं। बैठक में बताया गया कि बच्चों को केवल ‘कोवैक्सिन’ (covaxin) कोविड टीका ही दिया जायेगा। ‘कोवैक्सिन’ की अतिरिक्त डोज सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश को भेजी जा रही है। बच्चों के लिए एक अलग श्रेणी ‘वाई’ बनायी गयी है। बच्चों के दूसरा टीका 28 दिन के बाद लगेगा। बच्चों पर टीकाकरण की वही प्रक्रिया होगी जो वयस्कों पर लागू की गयी है। भूषण ने समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य कर्मियों, कोरोना योद्धाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए अतिरिक्त टीके - एहतियाती खुराक देने की व्यवस्था के संबंध में विचार विमर्श किया। 

उन्होंने कहा कि लाभार्थी को पात्र बनाने के लिए दूसरी खुराक लेने के नौ महीने या 39 सप्ताह बीत चुके होने चाहिए। उन्होंने कहा कि गंभीर बीमारियों से ग्रस्त किसी भी वरिष्ठ नागरिक को अतिरिक्त कोविड टीका (additional covid vaccine) लेने के लिए किसी डाक्टर के प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं है। उन्हें हालांकि अतिरिक्त टीका लेने से पहले अपने डाक्टर से सलाह लेनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि केंद्र सरकार ने इस मामले पर कोई निर्देश जारी नहीं किया है। भूषण (Rajesh Bhushan) ने कहा कि अतिरिक्त टीके के लिए पात्र सभी लोगों को संदेश भेजा जायेगा और इसे डिजिटल टीकाकरण प्रमाणपत्रों में दिखाया जायेगा। समीक्षा बैठक में कहा गया कि अतिरिक्त टीके के संबंध में जिलावार योजना बनाई जानी चाहिए।