भारत कोरोना की दूसरी लहर के कहर से जूझ रहा है। वहीं अब तीसरी लहर का खतरा भी देश में मंडराने लगा है। केंद्र सरकार के प्रिंसिपल साइंटिफिक एडवाइजर प्रोफेसर विजय राघवन का कहना है कि भारत में दूसरी लहर के बाद तीसरी लहर भी आएगी, लेकिन यह कब आएगी और कितनी खतरनाक होगी, इसके बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। कोरोना वायरस के वैरिएंट लगातार बदल रहे हैं, इसलिए हमें तीसरी लहर के लिए भी तैयार रहना होगा। 

उन्होंने कहा कि वैक्सीन प्रभावी है, लेकिन वैज्ञानिक इसको अपग्रेड करने पर भी काम कर रहे हैं। बेंगलुरु स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ में महामारी विशेषज्ञ डॉ. गिरिधर बाबू के अनुसार नवंबर के आखिरी में या दिसंबर की शुरुआत में देश में कोरोना की तीसरी लहर आने का खतरा है। अगली लहर युवा आबादी को प्रभावित कर सकती है। हालांकि अगर वैक्सीनेशन ज्यादा लोगों का कर पाए, तो इसका प्रभाव कम रहेगा।

कोरोना वायरस की आक्रामक दूसरी लहर के पीछे यूके और दक्षिण अफ्रीका में फैले नए स्ट्रेन हैं जो चार महीने पहले ही भारत आए थे। फिलहाल स्थिति यह है कि ब्रिटेन में मिला कोरोना वायरस का नया स्ट्रेन पूरे देश में फैल चुका है। जीनोम सीक्वेसिंग के जरिए सरकार को पता चला है कि ब्रिटेन में फैला स्ट्रेन भारत में केवल 485 यात्री और उनके परिवार से यह वायरस सामुदायिक फैलाव तक पहुंच गया। 26 राज्यों में सरकार को यूके वैरिएंट मिला है। जबकि 18 राज्यों में दोहरा म्यूटेशन भी सबसे ज्यादा लोगों में मिला है। जिन लोगों ने कभी विदेश यात्रा भी नहीं की उनमें भी यह नए स्ट्रेन काफी गंभीर परिणाम दिखा रहे हैं। 

पिछले वर्ष दिसंबर में यूके वैरिएंट भारत में मिला था लेकिन उसके बाद फरवरी तक आठ से 10 वैरिएंट भारत में मिल चुके थे। नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (एनसीडीसी) के निदेशक डॉ. सुजीत कुमार सिंह ने बताया कि देश में कोरोना को बढ़ाने में 50 फीसदी योगदान यूके वैरिएंट का रहा है। इसकी वजह से मरीजों की गंभीर स्थिति भी हो रही है। जैसे पिछले साल की तुलना में इस बार सांस लेने की परेशानी से ग्रस्त मरीजों की संख्या तीन से बढ़कर 54 फीसदी तक पहुंच गई है। 28 में से 26 राज्यों में यूके वैरिएंट का सामुदायिक प्रसार देखने को मिल चुका है।