कोरोना महामारी ने समूचे विश्व को फिर से अपने शिकंजे में लिया है। दिनोंदिन पॉजिटिव मरीज लाखों की तादाद में बढ़ते जा रहे हैं। प्रयासों के बावजूद मौतों पर भी नियंत्रण नहीं लग पा रहा। ऐसे में वैज्ञानिकों का कहना है टीकाकरण के साथ-साथ मास्क पहनना अब भी जरूरी है। साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग के जरिए भी इस महामारी से बचा जा सकता है। इन सबसे ऊपर मास्क की महत्ता को वैज्ञानिक सबसे अहम मान रहे हैं। 

उनके मुताबिक अनेक परत वाला मास्क पहनने से संक्रमण का खतरा 96 फीसदी तक कम किया जा सकता है। हाल ही हुए एक अध्ययन में इसका खुलासा हुआ है। अमरीका के जॉर्जिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों के मुताबिक मास्क बनाने में इस्तेमाल सामग्री, उसकी कसावट और इसमें इस्तेमाल की गईं परतें नोवेल कोरोना वायरस के संक्रमण के प्रसार को प्रभावित कर सकती है। उनका कहना है कि सही तरीके से बनाया गया अनेक परतों वाला मास्क व्यक्ति से निकलने वाले 84 प्रतिशत कणों को रोक देता है। 

दूसरी ओर इस तरह का मास्क पहने दो व्यक्ति कोरोना के प्रसार को करीब 96 प्रतिशत तक कम कर सकते हैं। जानकारी के अनुसार साइंस पत्रिका में इस बारे में लेख प्रकाशित किया गया। इसमें बताया गया कि विभिन्न किस्म के पदार्थों से अत्यंत छोटे कणों के निकलने के प्रभाव के बारे में अध्ययन किया गया। वैज्ञानिक नगा ली के अनुसार अतिसूक्ष्म कण हवा में घंटों तक और दिनों तक रह सकता है। यह हवा के आने-जाने के मार्ग पर निर्भर करता है, इसलिए यदि किसी कमरे में हवा निकासी की उचित व्यवस्था नहीं है तो ये छोटे कण बहुत लंबे समय तक रह सकते हैं।

जानकारी के अनुसार वैज्ञानिकों ने अपने अनुसंधान में 33 विभिन्न व्यावसायिक रूप से उपलब्ध पदार्थों का परीक्षण किया। इनमें सूती-पॉलिस्टर जैसे एक परत वाले बुने हुए कपड़े भी शामिल थे। उनके मुताबिक अध्ययन में एक ही तरह के पदार्थ में से भी तत्वों के निकलने के विविध परिणाम सामने आए।