महाराष्ट्र में लगातार बढ़ रहे कोरोना मामलों ने एक बार फिर से कोरोना वायरस को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे कोरोना मामलों में होने वाली इस अचानक वृद्धि के सटीक कारणों का पता लगाने में अभी तक असमर्थ रहे हैं। वहीं इनमें से कुछ लोग इसे कोविड-19 का अटपटा व्यवहार मान रहें हैं, जबकि कुछ लोग इसे विदर्भ के इलाके में संभवत: वायरस के नए म्यूटेशन के रुप में देख रहे हैं। साथ ही साथ इसे 2020 में होने वाले स्थानीय निकाय चुनावों और शादियों जैसे सामाजिक आयोजनों में ढिलाई बरतने का कारण भी माना जा रहा है।

वहीं वायरस के नए स्वरूप का पता लगाने के लिए सैम्‍पल्‍स की जीनोम सीक्‍वेंसिंग की जा रही है। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि पिछले एक महीने में महाराष्‍ट्र और केरल से करीब 900 सैम्‍पल भेजे गए हैं। दिल्‍ली में भी उपराज्‍यपाल अनिल बैजल ने अधिकाारियों को क्‍लस्‍टर-बेस्‍ड जीनोम सीक्‍वेंसिंग शुरू करने के निर्देश दिए हैं। क्‍लस्‍टर-बेस्‍ड जीनोम सीक्‍वेंस टेस्टिंग और सर्विलांस से वायरस के किसी म्‍यूटेशन की पहचान होती है।

खबर के मुताबिक, पंजाब और बेंगलुरु से भी जीनोम सीक्‍वेंसिंग के लिए सैम्‍पल्‍स मांगे गए हैं। तीन से चार दिन में यह साफ हो जाएगा कि इन राज्‍यों में कोविड केसेज बढ़ने के पीछे कोरोना वायरस का कोई नया वैरियंट है या नहीं। अबतक देशभर में करीब 6,000 सैम्‍पल्‍स की जीनोम सीक्‍वेंसिंग की जा चुकी है। भारत में अबतक जीनोम सीक्‍वेंसिंग के लिए 10 सर्विलांस साइट्स बनाई गई हैं। यूरोप की तरह भारत में बेहद संक्रामक यूके वैरियंट के उतने ज्‍यादा फैलने के सबूत नहीं मिले हैं। यूके वैरियंट के अबतक 187 केस सामने आए हैं। ब्राजील और साउथ अफ्रीका से भी नए वैरियंट मिले हैं। साउथ अफ्रीकन स्‍ट्रेन के अबतक चार केस और ब्राजील वैरियंट का एक केस ही सामने आया है।