केंद्र सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि लॉकडाउन और यात्रा प्रतिबंध के कारण अन्य विभिन्न देशों में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षित घर वापसी सात मई से शुरू होगी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ से कहा कि सात मई के बाद ही नेपाल में फंसे भारतीय सहित अन्य नागरिकों को विशेष विमानों के माध्यम से वापस लाया जा सकता है।

न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति एस. के कौल और न्यायमूर्ति बी.आर. गवई की पीठ वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उत्तराखंड में फंसे नेपाली प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षित स्वदेश वापसी सुनिश्चित करने के लिए केंद्र को निर्देश देने की मांग वाली एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी।याचिकाकर्ता ने 30 अप्रैल को शीर्ष अदालत को बताया था कि राष्ट्रव्यापी बंद के कारण नेपाल के लगभग 1,700 प्रवासी श्रमिक उत्तराखंड में भारत-नेपाल सीमा पर फ2ंसे हुए हैं। याचिकाकर्ता ने केंद्र से उन्हें अपने देश लौटने की अनुमति देने का आग्रह किया है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि सरकार को पता होना चाहिए कि कुछ स्थानों पर श्रमिक अभी भी फंसे हुए हैं और सरकार को इस पर गौर करना चाहिए। वहीं, याचिकाकर्ताओं ने कहा कि एक हजार नेपाली श्रमिकों को वापस जाना पड़ा है। उन्होंने कहा, ‘‘बड़ी संख्या में श्रमिकों को वापस भेज दिया गया है ... शेष 214 को वापस नहीं भेजा गया है।’’ मेहता ने कहा कि उन्हें विदेश मंत्रालय से निर्देश मिले हैं कि नेपाल सहित विदेशों में फंसे सभी भारतीय नागरिकों को 7 मई के बाद से वापस लाया जाएगा।