कोरोनावायरस के बढ़ते प्रकोप के बीच महामारी के संक्रमण को लेकर अमीर भारतीय कम भयभीत हैं। सामाजिक-आर्थिक रुझान को लेकर कराए गए आईएएनएस/सी-वोटर के सर्वे में यह बात सामने आई है। नवीनतम सर्वे से पता चलता है कि महामारी को लेकर लोगों में दहशत की भावना आने पर सामाजिक आर्थिक प्रगति और शैक्षिक योग्यता के बीच स्पष्ट संबंध है।

खुद या परिजन के कोविड-19 से संक्रमित होने के सावल के जवाब में अपर इनकम ग्रुप के 45.7 प्रतिशत लोगों ने मजबूती के साथ कहा है कि उन्हें ऐसा नहीं लगता, जबकि मध्यम आय समूह (मिडिल इनकम ग्रुप) में यह आंकड़ा थोड़ा कम 38.9 और निम्न आय समूह (लो इनकम ग्रुप) और अधिक कम 37.6 प्रतिशत रहा। इस प्रश्न से असहमत होने वालों की संख्या वित्तीय शक्ति के साथ ऊपर जाते दिखाई दी है। शिक्षा समूह की बात करें, तो महमारी को लेकर 42.3 प्रतिशत मिडिल एजुकेशन ग्रुप सबसे कम चिंतित है। जबकि 38.1 हायर एजुकेशन ग्रुप और 38.6 प्रतिशत लो एजुकेशन ग्रुप को इस बाबत ऐसा लगता है।

हालांकि, हायर एजुकेशन ग्रुप के बीच 20.2 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि वे पूरी तरह से असहमत हैं, जबकि अन्य दो एजुकेशन सेगमेंट में यह प्रतिशत काफी कम रहा। आईएएनएस सी-वोटर कोविड ट्रैकर फाइंडिंग एंड प्रोजेक्शन सीएटीआई पर एक दैनिक ट्रैकिंग पोल पर आधारित हैं। यह देशभर में 18 वर्ष या इससे अधिक आयु के वयस्कों के बीच पिछले सात दिनों के दौरान आयोजित किया गया है। सर्वे पिछले सात दिनों के दौरान सभी राज्यों के विधानसभा क्षेत्रों से रेंडम प्रोबेबिलिटी सैंपलिंग द्वारा जुटाई गई जानकारी पर आधारित है। नमूना का आकार 1,114 है और सर्वेक्षण 4 से 6 अप्रैल के बीच किया गया था।