देश की यूनिवर्सिटी और कॉलेज की स्नातक और स्नातकोत्तर प्रवेश नीति में अहम बदलाव हो सकता है। यह बदलाव कोरोना वायरस (कोविड-19) से जुड़ा है। कैंसर, एड्स जैसे घातक रोगों की तरह कोरोना से  पीड़ित परिवारों के विद्यार्थियों को प्रवेश में कुछ रियायत देने पर चर्चा शुरू हुई है। केंद्र और राज्य सरकार स्तर पर इसका फैसला किया जाएगा।

केंद्रीय और राज्य स्तरीय विश्वविद्यालयों, सरकारी और निजी कॉलेज में प्रथम, द्वितीय और तृतीय वर्ष सहित स्नातकोत्तर कक्षाओं में दाखिलें होते हैं। यूजीसी के निर्देशानुसार विश्वविद्यालय और राज्य स्तर पर उच्च शिक्षा विभाग प्रतिवर्ष प्रवेश नीति जारी करते हैं। दाखिलों के लिए सामान्य, ओबीसी, एमबीसी, ट्रांसजेंडर, आर्थिक पिछड़ा वर्ग, एससी-एसटी वर्ग, शहीद पुलिस, सैनिक, राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाडिय़ों के लिए आरक्षण का प्रावधान लागू है। साथ ही कैंसर, एड्स जैसे घातक रोगियों को भी प्रवेश में छूट दी जाती है।

डब्ल्यूएचओ ने कोरोना को महामारी घोषित किया है। इस महामारी से दुनिया में करीब 15 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं तथा 92 हजार से ज्यादा मौत हो चुकी हैं। ऐसे में मानव संसाधन विकास मंत्रालय सहित विश्वविद्यालयों-कॉलेज स्तर पर प्रवेश नीति पर चर्चा शुरू हुई है। इसके तहत कोविड-19 को भी स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर प्रवेश नियमों में शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।

कोरोना संक्रमण के चलते देश-दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी जबरदस्त असर दिख रहा है। इससे कई परिवारों की आर्थिक स्थिति प्रभावित होने के आसार हैं। लिहाजा कोविड-19 को प्रवेश नीति में शामिल करने की योजना बनाई जा रही है। इसका उद्देश्य कोरोना पीडि़त परिवार के विद्यार्थियों को प्रवेश में कुछ रियायत देना है।

इनका कहना है

अभी प्रवेश नीति बननी बाकी है। कोविड-19 को घातक रोगों की श्रेणी में शामिल करने पर उच्च शिक्षा मंत्री से चर्चा की जाएगी। निश्चित तौर पर इससे पीडि़त परिवारों के विद्यार्थियों को प्रवेश में सहूलियत और रियायत मिलेगी।

प्रदीप बोरड़, आयुक्त, कॉलेज शिक्षा विभाग